Loading...
अथर्ववेद के काण्ड - 1 के सूक्त 4 के मन्त्र

मन्त्र चुनें

  • अथर्ववेद का मुख्य पृष्ठ
  • अथर्ववेद - काण्ड 1/ सूक्त 4/ मन्त्र 1
    ऋषि: - सिन्धुद्वीपम् देवता - अपांनपात् सोम आपश्च देवताः छन्दः - गायत्री सूक्तम् - जल चिकित्सा सूक्त
    68

    अ॒म्बयो॑ य॒न्त्यध्व॑भिर्जा॒मयो॑ अध्वरीय॒ताम्। पृ॑ञ्च॒तीर्मधु॑ना॒ पयः॑ ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    अ॒म्वयः॑ । य॒न्ति॒ । अध्व॑ऽभिः । जा॒मयः॑ । अ॒ध्व॒रि॒ऽय॒ताम् ।पृ॒ञ्च॒तीः । मधु॑ना । पय॑: ॥


    स्वर रहित मन्त्र

    अम्बयो यन्त्यध्वभिर्जामयो अध्वरीयताम्। पृञ्चतीर्मधुना पयः ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    अम्वयः । यन्ति । अध्वऽभिः । जामयः । अध्वरिऽयताम् ।पृञ्चतीः । मधुना । पय: ॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 1; सूक्त » 4; मन्त्र » 1
    Acknowledgment

    पदार्थ -
    (अम्बयः) पाने योग्य माताएँ और (जामयः) मिलकर भोजन करने हारी, बहिनें [वा कुलस्त्रियाँ] (मधुना) मधु के साथ (पयः) दूध को (पृञ्चतीः) मिलाती हुई (अध्वरीयताम्) हिंसा न करने हारे यजमानों के (अध्वभिः) सन्मार्गों से (यन्ति) चलती हैं ॥१॥

    भावार्थ - जो पुरुष, पुत्रों के लिये माताओं के समान और भाइयों के लिये बहिनों के समान हितकारी होते हैं, वे सन्मार्गों से आप चलते और सबको चलाते हैं ॥१॥


    Bhashya Acknowledgment

    Meaning -
    Streams of nature’s living energy, life giving mothers and loving sisters of humanity, performing the soma yajna of their life of love and non-violence, flow on by their divine paths on the vedi of life mixing the waters of living vitality with the sweets of honey and soma of joyous living for us.


    Bhashya Acknowledgment
    Top