अथर्ववेद के काण्ड - 20 के सूक्त 106 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 20/ सूक्त 106/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - गोषूक्त्यश्वसूक्तिनौ देवता - इन्द्रः छन्दः - उष्णिक् सूक्तम् - सूक्त-१०६
    पदार्थ -

    [हे परमेश्वर !] (तव) तेरे (त्यत्) उस [प्रसिद्ध] (बृहत्) बड़े (इन्द्रियम्) इन्द्रपन [ऐश्वर्य], (तव) तेरे (शुष्मम्) बल (उत) और (क्रतुम्) बुद्धि और (वरेण्यम्) उत्तम (वज्रम्) वज्र [दण्डसामर्थ्य] को (धिषणा) [तेरे] वाणी (शिशाति) पैना करती है ॥१॥

    भावार्थ -

    मनुष्य परमेश्वर के गुणों को वेद द्वारा निश्चय करके अपना सामर्थ्य बढ़ावें ॥१॥

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