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अथर्ववेद के काण्ड - 5 के सूक्त 5 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 5/ सूक्त 5/ मन्त्र 1
    ऋषि: - अथर्वा देवता - लाक्षा छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - लाक्षा
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    रात्री॑ मा॒ता नभः॑ पि॒तार्य॒मा ते॑ पिताम॒हः। सि॑ला॒ची नाम॒ वा अ॑सि॒ सा दे॒वाना॑मसि॒ स्वसा॑ ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    रात्री॑ । मा॒ता । नभ॑: । पि॒ता । अ॒र्य॒मा । ते॒ । पि॒ता॒म॒ह: । सि॒ला॒ची । नाम॑ । वै । अ॒सि॒ । सा । दे॒वाना॑म् । अ॒सि॒ । स्वसा॑ ॥५.१॥


    स्वर रहित मन्त्र

    रात्री माता नभः पितार्यमा ते पितामहः। सिलाची नाम वा असि सा देवानामसि स्वसा ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    रात्री । माता । नभ: । पिता । अर्यमा । ते । पितामह: । सिलाची । नाम । वै । असि । सा । देवानाम् । असि । स्वसा ॥५.१॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 5; सूक्त » 5; मन्त्र » 1
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    पदार्थ -
    [हे परमात्मन् !] (ते) तेरी (माता) निर्माण शक्ति (रात्री) विश्राम देनेवाली रात्रि समान, (पिता) पालनेवाला गुण (नभः) आकाश वा मेघ के समान, और (पितामहः) हमारे पालनेवाले का पालनेवाला तेरा गुण (अर्यमा) विघ्नों को रोकनेवाले सूर्य के समान है। (सिलाची) सब में मेल रखनेवाली शक्ति (नाम) नाम (वे) अवश्य ही (असि) तू है, (सा) सो तू (देवानाम्) दिव्य गुणों की (स्वसा) अच्छे प्रकार प्रकाश करनेहारी शक्ति (असि) है ॥१॥

    भावार्थ - परमेश्वर ही, जो शक्तिविशेष है, संसार के सब पदार्थों का कर्ता धर्ता है ॥१॥


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    Meaning -
    O laksha, the night is your mother, the cloud in the sky is your father and the sun is your grandfather. Your name is Silachi, and you are sister of the divinities.


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