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अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 108 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 108/ मन्त्र 1
    ऋषिः - शौनक् देवता - मेधा छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - मेधावर्धन सूक्त
    128

    त्वं नो॑ मेधे प्रथ॒मा गोभि॒रश्वे॑भि॒रा ग॑हि। त्वं सूर्य॑स्य र॒श्मिभि॒स्त्वं नो॑ असि य॒ज्ञिया॑ ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    त्वम् । न॒: । मे॒धे॒ । प्र॒थ॒मा । गोभि॑: । अश्वे॑भि: । आ । ग॒हि॒ । त्वम् । सूर्य॑स्य । र॒श्मिऽभि॑: । त्वम् । न॒: । अ॒सि॒ । य॒ज्ञिया॑ ॥१०८.१॥


    स्वर रहित मन्त्र

    त्वं नो मेधे प्रथमा गोभिरश्वेभिरा गहि। त्वं सूर्यस्य रश्मिभिस्त्वं नो असि यज्ञिया ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    त्वम् । न: । मेधे । प्रथमा । गोभि: । अश्वेभि: । आ । गहि । त्वम् । सूर्यस्य । रश्मिऽभि: । त्वम् । न: । असि । यज्ञिया ॥१०८.१॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 6; सूक्त » 108; मन्त्र » 1
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    हिन्दी (3)

    विषय

    बुद्धि और धन की प्राप्ति के लिये उपदेश।

    पदार्थ

    (मेधे) हे धारणावती बुद्धि वा संपत्ति ! (प्रथमा) प्रख्यात (त्वम्) तू (गोभिः) गौओं और (अश्वेभिः) घोड़ों के साथ (नः) हमको (आ गहि) प्राप्त हो। (त्वम्) तू (सूर्यस्य) सूर्य की (रश्मिभिः) फैलनेवाली किरणों के साथ वर्तमान, और (त्वम्) तू (नः) हमारी (यज्ञिया) पूजनीय (असि) है ॥१॥

    भावार्थ

    मनुष्य सूर्य के समान प्रख्यात स्मरणशील बुद्धि और श्रेष्ठ धन प्राप्त करके सांसारिक और पारमार्थिक व्यवहार सिद्ध करें ॥१॥

    टिप्पणी

    १−(त्वम्) (नः) अस्मान् (मेधे) मिधृ मेधृ संगमे च, चकारात् हिंसामेधयोश्च−घञ्। मेधा धननाम−निघ० २।१०। मेधावी कस्मान्मेधया तद्वान् भवति मेधा मतौ धीयते−निरु० ३।१९। हे धारणावति बुद्धे हे धन (प्रथमा) प्रख्याता। मुख्या (गोभिः) गवादिपशुभिः (अश्वेभि) अश्वैः। अश्वादिवहनशीलैः (सूर्यस्य) प्रेरकस्य। आदित्यस्य (रश्मिभिः) व्यापनशीलैः। किरणैः (नः) अस्माकम् (असि) वर्तसे (यज्ञिया) यज्ञ−घ। यज्ञार्हा। पूजनीया ॥

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    विषय

    'गोभिः अश्वेभि:' मेधा

    पदार्थ

    १. हे (मेधे) = आत्मा को धारण करनेवाली चितिशक्ते! (त्वम्) = तु (नः) = हमें (गोभिः अश्वेभिः) = ज्ञानेन्द्रियों तथा कर्मेन्द्रियों के साथ (आगहि) = प्राप्त हो। हमें उत्तम ज्ञानेन्द्रियों तथा कर्मेन्द्रियों के साथ बुद्धि प्राप्त हो। तू ही (प्रथमा) = सबसे मुख्य है। हे मेधे! तू (सूर्यस्य रश्मिभि:) = ज्ञान के सूर्य प्रभु को ज्ञानमयी किरणों के साथ प्राप्त हो, (त्वम्) = तू ही (न:) = हमारे (यज्ञिया) = जीवन-यज्ञ का सम्पादन करनेवाली असि है।

    भावार्थ

    हमें उत्तम ज्ञानेन्द्रियों व कर्मेन्द्रियों के साथ मेधा प्राप्त हो। इसके द्वारा हम ज्ञानसूर्य प्रभु से ज्ञान की रश्मियों को प्राप्त करें। यह हमारे जीवन-यज्ञ का सम्पादन करनेवाली हो।

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    भाषार्थ

    (मेधे) हे मेधा शक्ति ! (त्वम्) तू (नः) हमारे लिये (प्रथमा) प्रथम उपादेया है, तू (गोभिः अश्व:) गौओं और अश्वों के साथ (आ गहि) आ। (त्वम्) तू (सूर्यस्य रश्मिभिः) सूर्य की रश्मियों के साथ आ, अर्थात् प्रातः काल में आ (त्वम्) तू (नः) हमारे लिये (यज्ञिया) सत्कार योग्य और संगतियोग्य है।

    टिप्पणी

    [मेधा है धारणाशक्ति। जो गुरुमुख से सुना और स्वयं पढ़ा उसे चित्त में स्थिर रखना। प्रातः काल स्वाध्याय का श्रेष्ठ समय है, क्योंकि यह सात्त्विक काल है। गृहस्थ जीवन के लिये गौओं और अश्वों का भी उपोर्जन करना आवश्यक है।]

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Intelligence

    Meaning

    O Medha, noble intelligence, you are the first and adorable faculty of ours for our good. Come to us with lands, cows, wisdom and culture. Come to us with horses and achievements. Come to us with the rays of the sun. (Intelligence is the faculty that helps the spirit to knowledge, action, initiative and achievement. It is a source of inspiration, not a substitute for action.)

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    Subject

    Medha : Understanding

    Translation

    O understanding (medha), the most important, may you come to us with cows, with horses and with rays of the sun. You are adorable to us (useful for our sacrifices).

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    Translation

    Let this knowledge of the Vedic revelation which is primordial, come to us with its brilliant rays and comprehensive projections. Let it come to us with the livings of the effulgence of all-impelling God. This knowledge is full of sacredness and perspicacity.

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    Translation

    Intelligence, thou art foremost, worshipped by men and sages. Come unto us with the organs of cognition and action. Come with God's rays of knowledge. Thou art the accomplisher of the Yajna (sacrifice) of life!

    Footnote

    Organs of cognition and action: Gyana Indriyas and Karama Indriyas.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    १−(त्वम्) (नः) अस्मान् (मेधे) मिधृ मेधृ संगमे च, चकारात् हिंसामेधयोश्च−घञ्। मेधा धननाम−निघ० २।१०। मेधावी कस्मान्मेधया तद्वान् भवति मेधा मतौ धीयते−निरु० ३।१९। हे धारणावति बुद्धे हे धन (प्रथमा) प्रख्याता। मुख्या (गोभिः) गवादिपशुभिः (अश्वेभि) अश्वैः। अश्वादिवहनशीलैः (सूर्यस्य) प्रेरकस्य। आदित्यस्य (रश्मिभिः) व्यापनशीलैः। किरणैः (नः) अस्माकम् (असि) वर्तसे (यज्ञिया) यज्ञ−घ। यज्ञार्हा। पूजनीया ॥

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