अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 6 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 6/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - अथर्वा देवता - ब्रह्मणस्पतिः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - शत्रुनाशन सूक्त
    पदार्थ -

    (ब्रह्मणः पते) हे ब्रह्माण्ड के रक्षक ! (यः) जो (अदेवः) नास्तिक वा कुव्यवहारी पुरुष (अस्मान्) हम से (अभिमन्यते) अभिमान करता है। (तम्) उस (सर्वम्) सब को (सुन्वते) तत्त्वमन्थन करनेवाले, (यजमानाय) विद्वानों का आदर करनेवाले (मे) मेरे लिये (रन्धयासि) वश में कर ॥१॥

    भावार्थ -

    मनुष्य परमेश्वर का ध्यान करता हुआ विवेकपूर्वक यथावत् परीक्षा करके विघ्नों का नाश करे ॥१॥

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