ऋग्वेद मण्डल - 9 के सूक्त 35 के मन्त्र
1 2 3 4 5 6

मन्त्र चुनें

  • ऋग्वेद का मुख्य पृष्ठ
  • ऋग्वेद - मण्डल 9/ सूक्त 35/ मन्त्र 1
    ऋषि: - प्रभुवसुः देवता - पवमानः सोमः छन्दः - गायत्री स्वरः - षड्जः
    पदार्थ -

    (पवमान) हे सबको पवित्र करनेवाले परमात्मन् ! (नः धारया आपवस्व) हमको आप आनन्द की धारा से भली प्रकार पवित्र करिये (रयिम् पृथुम्) और बड़े भारी ऐश्वर्य को दीजिये (यया नः ज्योतिः विदासि) उसी आनन्द की धारा से आप ज्ञानप्रद हैं ॥१॥

    भावार्थ -

    जो पुरुष अपने आपको परमात्मज्ञान का पात्र बनाते हैं, परमात्मा उन्हें आनन्द की वृष्टि से सिञ्चित करते हैं ॥१॥

    पदार्थ -

    (पवमान) हे सर्वस्य पवितः परमात्मन् ! (नः धारया आपवस्व) अस्मान् आनन्दस्य धारया सुष्ठु पुनातु (रयिम् पृथुम्) महदैश्वर्यं च देहि (यया नः ज्योतिः विदासि) ययानन्दधारया भवान् ज्ञानप्रदोऽस्ति ॥१॥

    कृपया कम से कम 20 शब्द लिखें!
    Top