अथर्ववेद के काण्ड - 11 के सूक्त 6 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 11/ सूक्त 6/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - शन्तातिः देवता - चन्द्रमा अथवा मन्त्रोक्ताः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - पापमोचन सूक्त
    पदार्थ -

    (अग्निम्) अग्नि, (वनस्पतीन्) वनस्पतियों [बड़े वक्षों] (ओषधीः) ओषधियों [अन्न आदिकों], (उत) और (वीरुधः) [विविध प्रकार उगनेवाली] जड़ी-बूटियों, (इन्द्रम्) इन्द्र [मेघ] और (बृहस्पतिम्) बड़े-बड़े लोकों के पालन करनेवाले (सूर्यम्) सूर्य का (ब्रूमः) हम कथन करते हैं, (ते) वे (नः) हमें (अंहसः) कष्ट से (मुञ्चन्तु) छुड़ावें ॥१॥

    भावार्थ -

    विद्वानों को योग्य है कि अग्नि आदि पदार्थों के गुण जानकर, उनसे यथावत् उपकार लेकर दुःखों का नाश करें ॥१॥

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