Loading...

मन्त्र चुनें

  • अथर्ववेद का मुख्य पृष्ठ
  • अथर्ववेद - काण्ड 14/ सूक्त 2/ मन्त्र 1
    ऋषि: - आत्मा देवता - अनुष्टुप् छन्दः - सवित्री, सूर्या सूक्तम् - विवाह प्रकरण सूक्त
    244

    तुभ्य॒मग्रे॒पर्य॑वहन्त्सू॒र्यां व॑ह॒तुना॑ स॒ह। स नः॒ पति॑भ्यो जा॒यां दा अ॑ग्ने प्र॒जया॑स॒ह ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    तुभ्य॑म् । अग्रे॑ । परि॑ । अ॒व॒ह॒न् । सू॒र्याम् । व॒ह॒तुना॑ । स॒ह । स: । न॒: । पति॑ऽभ्य: । जा॒याम् । दा: । अग्ने॑ । प्र॒ऽजया॑ । स॒ह ॥२.१॥


    स्वर रहित मन्त्र

    तुभ्यमग्रेपर्यवहन्त्सूर्यां वहतुना सह। स नः पतिभ्यो जायां दा अग्ने प्रजयासह ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    तुभ्यम् । अग्रे । परि । अवहन् । सूर्याम् । वहतुना । सह । स: । न: । पतिऽभ्य: । जायाम् । दा: । अग्ने । प्रऽजया । सह ॥२.१॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 14; सूक्त » 2; मन्त्र » 1
    Acknowledgment

    पदार्थ -
    (अग्ने) हे सर्वज्ञपरमात्मन् ! (अग्रे) पहिले से वर्तमान (तुभ्यम्) तेरे लिये [तेरी आज्ञा पालन केलिये] (सूर्याम्) प्रेरणा करनेवाली [वा सूर्य की चमक के समान तेजवाली] कन्या को (वहतुना सह) दाय [यौतुक, अर्थात् विवाह में दिये हुए पदार्थ] के साथ (परि) सबप्रकार से (अवहन्) वे [विद्वान् लोग] लाये हैं, (सः) सो तू [हे परमेश्वर !] (नःपतिभ्यः) हम पतिकुलवालों के हित के लिये (जायाम्) इस पत्नी को (प्रजया सह) प्रजा [सन्तान सेवक आदि] के साथ (दाः) दे ॥१॥

    भावार्थ - अनादि परमात्मा कीउपासना करके विद्वान् लोग गुणवती कन्या को यौतुक आदि के साथ पतिकुल में आनन्दसे रहने के लिये आशीर्वाद देवें ॥१॥यह मन्त्र कुछ भेद से ऋग्वेद में है−१०।८५।३८, और महर्षिदयानन्दकृत संस्कारविधि विवाहप्रकरण में वधू-वर केयज्ञकुण्ड की प्रदक्षिणा करने में उद्धृत है ॥


    Bhashya Acknowledgment

    Meaning -
    O Agni, spirit of light and life, the divinities first conducted Surya, the bride, with her bridal wealth to you. May you now give her with her maturity and motherly potential as wife to the bridegroom and his family who will honour, protect and maintain her. (Refer also to Rgveda 10, 85, 40) (When a girl child is born, the parents think of her upbringing, education and preparation for her settlement under the divine care of Agni, divine spirit of life and light. When she is mature with full health, education and bridal accomplishments, she is married and given over to the bridegroom and his family. The word ‘pad’ means husband but it also means one who cares for her and maintains and protects her. And when she comes to the family of the bridegroom she becomes the responsibility of the entire family. Hence ‘patibhyah’ here means the bridegroom and other members of the family who will care, maintain and protect her and help her grow further as mother head of the family.)


    Bhashya Acknowledgment
    Top