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अथर्ववेद के काण्ड - 20 के सूक्त 59 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 59/ मन्त्र 1
    ऋषिः - मेध्यातिथिः देवता - इन्द्रः छन्दः - प्रगाथः सूक्तम् - सूक्त-५९
    74

    उदु॒ त्ये मधु॑ मत्त॒मा गिर॒ स्तोमा॑स ईरते। स॑त्रा॒जितो॑ धन॒सा अक्षि॑तोतयो वाज॒यन्तो॒ रथा॑ इव ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    उत् । ऊं॒ इति॑ । त्ये । मधु॑मत्ऽतमा: । गिर॑: । स्तोमा॑स: । ई॒र॒ते॒ ॥ स॒त्रा॒ऽजित॑: । ध॒न॒सा: । अक्षि॑तऽऊतय: । वा॒ज॒ऽयन्त॑: । रथा॑:ऽइव ॥५९.१॥


    स्वर रहित मन्त्र

    उदु त्ये मधु मत्तमा गिर स्तोमास ईरते। सत्राजितो धनसा अक्षितोतयो वाजयन्तो रथा इव ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    उत् । ऊं इति । त्ये । मधुमत्ऽतमा: । गिर: । स्तोमास: । ईरते ॥ सत्राऽजित: । धनसा: । अक्षितऽऊतय: । वाजऽयन्त: । रथा:ऽइव ॥५९.१॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 20; सूक्त » 59; मन्त्र » 1
    Acknowledgment

    हिन्दी (3)

    विषय

    १-२ ईश्वर की उपासना का उपदेश।

    पदार्थ

    (त्ये) वे (मधुमत्तमाः) अतिमधुर (स्तोमासः) स्तोत्र (उ) और (गिरः) वाणियाँ (उत् ईरते) ऊँची जाती हैं। (इव) जैसे (सत्राजितः) सत्य से जीतनेवाले, (धनसाः) धन देनेवाले, (अक्षितोतयः) अक्षय रक्षा करनेवाले, (वाजयन्तः) बल प्रकट करते हुए (रथाः) रथ [आगे बढ़ते हैं] ॥१॥

    भावार्थ

    जैसे शूरवीरों के रथ रणक्षेत्र में विजय पाने के लिये उमंग से चलते हैं, वैसे ही मनुष्य दोषों और दुष्टों को वश में करने के लिये परमात्मा की स्तुति को किया करें ॥१॥

    टिप्पणी

    मन्त्र १, २ आचुके हैं-अ० २०।१०।१-२ ॥ १-२−मन्त्रौ व्याख्यातौ अ० २०।१०।१-२ ॥

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    विषय

    देखो व्याख्या अथर्व० २०.१०.१-२

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    भाषार्थ

    (त्ये) वे प्रसिद्ध (गिरः) वैदिक स्तुतिवाणियाँ, और (मधुमत्तमाः) अत्यन्त मधुर (स्तोमासः) सामगान, (उद्) उच्चस्वर में, हे परमेश्वर! आपके प्रति (ईरते) प्रेरित किये जा रहे हैं, (इव) जैसे कि (सत्राजितः) वस्तुतः विजय करानेवाले, (धनसाः) व्यापार द्वारा धन की प्राप्ति करानेवाले, (अक्षितोतयः) न क्षीण होनेवाली रक्षा प्रदान करनेवाले, (वाजयन्तः) गति और वेग के साधनभूत (रथाः) विमान-रथ, (उद् ईरते) ऊँचे आकाश में प्रेरित किये जाते हैं।

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Indra Devata

    Meaning

    The sweetest of honeyed songs of praise and vibrations of homage rise to you flying like victorious, unviolated and invincible chariots laden with gold heading for higher destinations.

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    Translation

    These sweetest praise worthy songs of ours ascend to Him (God) like ever-conquering chariot, which gains wealth and give unfailing protection.

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    Translation

    These sweetest praiseworthy songs of ours ascend to Him (God) like ever-conquering chariot, which gains wealth and give unfailing protection.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    मन्त्र १, २ आचुके हैं-अ० २०।१०।१-२ ॥ १-२−मन्त्रौ व्याख्यातौ अ० २०।१०।१-२ ॥

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    बंगाली (2)

    मन्त्र विषय

    ১-২ ঈশ্বরোপাসনোপদেশঃ

    भाषार्थ

    (ত্যে) সেই (মধুমত্তমাঃ) সুমধুর (স্তোমাসঃ) স্তোত্র (উ) এবং (গিরঃ) বাণীসমূহ (উৎ ঈরতে) উচ্চতায় থাকে। (ইব) যেমন (সত্রাজিতঃ) সত্য দ্বারা বিজয়ী, (ধনসাঃ) ধন প্রদাতা, (অক্ষিতোতয়ঃ) অক্ষয় রক্ষাকারী (বাজয়ন্তঃ) বল প্রকট করে (রথাঃ) রথ [অগ্রসর হয়] ॥১॥

    भावार्थ

    যেমন বীরদের রথ রণক্ষেত্রে বিজয় প্রাপ্তির জন্য অগ্রসর হয়, তেমনই মনুষ্য দোষ এবং দুষ্টদের বশবর্তী করার জন্য পরমাত্মার স্তুতি আনন্দপূর্বক করুক ॥১॥ মন্ত্র আছে-অ০ ২০।১০।১, ২।।

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    भाषार्थ

    (ত্যে) সেই প্রসিদ্ধ (গিরঃ) বৈদিক স্তুতিবাণী-সমূহ, এবং (মধুমত্তমাঃ) অত্যন্ত মধুর (স্তোমাসঃ) সামগান, (উদ্) উচ্চস্বরে, হে পরমেশ্বর! আপনার প্রতি (ঈরতে) প্রেরিত করা হচ্ছে, (ইব) যেমন (সত্রাজিতঃ) বস্তুতঃ বিজয় প্রদানকারী, (ধনসাঃ) বাণিজ্য দ্বারা ধন প্রদানকারী, (অক্ষিতোতয়ঃ) অক্ষীণ রক্ষা প্রদানকারী, (বাজয়ন্তঃ) গতি এবং বেগের সাধনভূত (রথাঃ) বিমান-রথ, (উদ্ ঈরতে) উঁচু আকাশে প্রেরিত করা হয়।

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