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अथर्ववेद के काण्ड - 3 के सूक्त 13 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 3/ सूक्त 13/ मन्त्र 1
    ऋषि: - भृगुः देवता - वरुणः, सिन्धुः, आपः छन्दः - निचृदनुष्टुप् सूक्तम् - आपो देवता सूक्त
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    यद॒दः सं॑प्रय॒तीरहा॒वन॑दता ह॒ते। तस्मा॒दा न॒द्यो॒ नाम॑ स्थ॒ ता वो॒ नामा॑नि सिन्धवः ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    यत् । अ॒द: । स॒म्ऽप्र॒य॒ती॒: । अहौ॑ । अन॑दत । ह॒ते । तस्मा॑त् । आ । न॒द्य᳡: । नाम॑ । स्थ॒ । ता । व॒: । नामा॑नि । सि॒न्ध॒व॒: ॥१३.१॥


    स्वर रहित मन्त्र

    यददः संप्रयतीरहावनदता हते। तस्मादा नद्यो नाम स्थ ता वो नामानि सिन्धवः ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    यत् । अद: । सम्ऽप्रयती: । अहौ । अनदत । हते । तस्मात् । आ । नद्य: । नाम । स्थ । ता । व: । नामानि । सिन्धव: ॥१३.१॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 3; सूक्त » 13; मन्त्र » 1
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    पदार्थ -
    (सिन्धवः) हे बहनेवाली नदियों ! (संप्रयतीः=संप्रयत्यः+यूयम्) मिलकर आगे बढ़ती हुई तुमने (अहौ हते) मेघ के ताड़े जाने पर (अदः) वह (यत्) जो (अनहत) नाद किया है। (तस्मात्) इसलिये (आ) ही (नद्यः) नाद करनेवाली, नदी (नाम) नाम (स्थ) तुम हो, (ता=तानि) वह [वैसे ही] (वः) तुम्हारे (नामानि) नाम हैं ॥१॥

    भावार्थ - जब मेघ आपस में टकराकर गरजकर बरसते हैं, तब वह जल पृथिवी पर एकत्र होकर नाद करता हुआ बहता है, इससे उसका नदी नाम है। इसी प्रकार वैदिक शब्दों की व्युत्पत्ति समझकर अर्थ करना चाहिये ॥१॥ अजमेर पुस्तक में ‘संप्रयतिः’ है, हमने अन्य पुस्तकों से ‘संप्रयतीः’ पाठ लिया है ॥


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    Meaning -
    O waters which, on the break of the cloud, flow on together, roaring, roaring, for which reason you have the names ‘nadyah’, i.e., those that flow, roaring. For that very reason, your names are ‘Sindhavah’, i.e., those that flow as floods. (‘Nadyah’ and Sindhavah are plural forms of ‘nadi’ and ‘sindhu’. Every stream is nadi and every river is sindhu. Hence the river Indus also is called Sindha or Sindhu which now is a particular name through the historical process of particularisation. But in the Veda, Sindhu is a general name for any river, the reason being that it is the name of water flowing in flood anywhere.)


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