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अथर्ववेद के काण्ड - 3 के सूक्त 16 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 3/ सूक्त 16/ मन्त्र 3
    ऋषि: - अथर्वा देवता - भगः, आदित्याः छन्दः - त्रिष्टुप् सूक्तम् - कल्याणार्थप्रार्थना
    28

    भग॒ प्रणे॑त॒र्भग॒ सत्य॑राधो॒ भगे॒मां धिय॒मुद॑वा॒ दद॑न्नः। भग॒ प्र णो॑ जनय॒ गोभि॒रश्वै॒र्भग॒ प्र नृभि॑र्नृ॒वन्तः॑ स्याम ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    भग॑ । प्रऽने॑त: । भग॑ । सत्य॑ऽराध: । भग॑ । इ॒माम् । धिय॑म् । उत् । अ॒व॒ । दद॑त् । न॒: । भग॑ । प्र । न॒: । ज॒न॒य॒ । गोभि॑: । अश्वै॑: । भग॑ । प्र । नृऽभि॑: । नृ॒ऽवन्त॑: । स्या॒म॒ ॥१६.३॥


    स्वर रहित मन्त्र

    भग प्रणेतर्भग सत्यराधो भगेमां धियमुदवा ददन्नः। भग प्र णो जनय गोभिरश्वैर्भग प्र नृभिर्नृवन्तः स्याम ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    भग । प्रऽनेत: । भग । सत्यऽराध: । भग । इमाम् । धियम् । उत् । अव । ददत् । न: । भग । प्र । न: । जनय । गोभि: । अश्वै: । भग । प्र । नृऽभि: । नृऽवन्त: । स्याम ॥१६.३॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 3; सूक्त » 16; मन्त्र » 3
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    पदार्थ -
    (भग) हे भगवान् ! (प्रणेतः) हे बड़े नेता ! (भग) हे सेवनीय ! (सत्यराधः) हे सत्य धनी ! (भग) हे ज्ञानस्वरूप परमेश्वर ! (इमाम्) इस [वेदोक्त] (धियम्) बुद्धि को (ददत्) देता हुआ तू (नः) हमारी (उत्) उत्तमता से (अवा) रक्षा कर। (भग) हे ज्योतिःस्वरूप ! (नः) हमको (गोभिः) गौओं से और (अश्वैः) घोड़ों से (प्र जनय) अच्छे प्रकार बढ़ा। (भग) हे शिव (नृभिः) नेता पुरुषों के साथ हम (नृवन्तः) नेता पुरुषोंवाले होकर (प्र स्याम) समर्थ होवें ॥३॥

    भावार्थ - जो मनुष्य ईश्वर की प्रार्थना और आज्ञा पालन करते और नेता वा वीर पुरुषों को अपनाते हैं, वे संसार में उन्नति करके यशस्वी और ऐश्वर्यवान् होते हैं ॥३॥


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    Meaning -
    Lord of glory, lord of inspiration for advancement, lord of truth and beneficence, lord of light and knowledge, blest us as you have with intelligence, we pray, save this intelligence of ours from sin and lead us to the vision of divinity. Lord of power and prosperity, help us grow with cows and horses, let us advance with manpower, bless us with men of vision and leaders of quality.


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