अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 114 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 114/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - ब्रह्मा देवता - विश्वे देवाः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - उन्मोचन सूक्त
    पदार्थ -

    (देवाः) हे विद्वानो ! (देवासः) खेल करते हुए (वयम्) हम लोगों ने (यत्) जो (देवहेडनम्) विद्वानों का अनादर (चकृम) किया है। (आदित्याः) सूर्यसमान तेजस्वी ! (यूयम्) तुम लोग (तस्मात्) उस [पाप] से (नः) हमको (ऋतस्य) धर्म के (ऋतेन) सत्य व्यवहार द्वारा (मुञ्चत) छुड़ाओ ॥१॥

    भावार्थ -

    यदि मनुष्यों से प्रमाद के कारण विद्वानों का अनादर हो जाये तो उनको योग्य है कि वे धार्मिक व्यवहार करके विद्वानों को प्रसन्न करें ॥१॥

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