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अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 59 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 59/ मन्त्र 3
    ऋषिः - अथर्वा देवता - ओषधिः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - ओषधि सूक्त
    81

    वि॒श्वरू॑पां सु॒भगा॑म॒च्छाव॑दामि जीव॒लाम्। सा नो॑ रु॒द्रस्या॒स्तां हे॒तिं दू॒रं न॑यतु॒ गोभ्यः॑ ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    वि॒श्वऽरू॑पाम् । सु॒ऽभगा॑म् । अ॒च्छ॒ऽआव॑दामि । जी॒व॒लाम् । सा । न॑: । रु॒द्रस्य॑ । अ॒स्ताम् । हे॒तिम् । दू॒रम् । न॒य॒तु॒ । गोभ्य॑: ॥५९.३॥


    स्वर रहित मन्त्र

    विश्वरूपां सुभगामच्छावदामि जीवलाम्। सा नो रुद्रस्यास्तां हेतिं दूरं नयतु गोभ्यः ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    विश्वऽरूपाम् । सुऽभगाम् । अच्छऽआवदामि । जीवलाम् । सा । न: । रुद्रस्य । अस्ताम् । हेतिम् । दूरम् । नयतु । गोभ्य: ॥५९.३॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 6; सूक्त » 59; मन्त्र » 3
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    सब सुख की प्राप्ति का उपदेश।

    पदार्थ

    (विश्वरूपाम्) सबका रूप [रचना] करनेवाली, (सुभगाम्) बड़े ऐश्वर्यवाली, (जीवलाम्) जीवन देनेवाली अथवा जीवन सामर्थ्यवाली शक्ति परमात्मा को (अच्छावदामि) मैं स्वागत करके आवाहन करता हूँ। (सा) वह (रुद्रस्य) दुःखनाशक परमेश्वर की (अस्ताम्) गिराई हुई (हेतिम्) ताड़ना को (नः) हमारी (गोभ्यः) भूमियों से (दूरम्) दूर (नयतु) ले जावे ॥३॥

    भावार्थ

    मनुष्य सर्वशक्तिमान् परमेश्वर को सर्वव्यापी जानकर पाप करके दण्डभागी न होवें ॥३॥

    टिप्पणी

    ३−(विश्वरूपाम्) विश्वस्य रूपं रचनं यस्यास्ताम् जगद्रूपकर्त्रीम् (सुभगाम्) शोभनैश्वर्यवतीम् (अच्छावदामि) अच्छ सुष्ठु स्वागतेन आवदामि आह्वयामि (जीवलाम्) आतोऽनुपसर्गे कः। पा० ३।२।३। इति जीव+रा दाने−क, रस्य लत्वम्। जीवनदात्रीम्। यद्वा। सिध्मादिभ्यश्च। पा० ५।२।९७। इति जीव−मत्वर्थीयो लच्। जीवनवतीं शक्तिं परमेश्वरम् (सा) शक्तिः (नः) अस्माकम् (रुद्रस्य) अ० २।२७।६। दुःखनाशकस्य परमेश्वरस्य (अस्ताम्) असु क्षेपणे−क्त। क्षिप्ताम् (हेतिम्) ताडनाम् (दूरम्) (नयतु) गमयतु (गोभ्यः) भूमिभ्यः ॥

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    विषय

    "विश्वरूपा सुभगा जीवला' अरुन्धती

    पदार्थ

    १. (विश्वरूपाम्) = नीरोगता द्वारा सबको उत्तम रूप देनेवाली, (सुभगाम्) = उत्तम ऐश्वर्यशाली, (जीवलाम्) = जीवनीशक्ति को देनेवाली इस अरुन्धती को (अच्छ वदामि) = लक्ष्य करके कहता हूँ कि (सा) = वह अरुन्धती (रुद्रस्य अस्तां हेतिम्) = हमारी त्रुटियों के परिणामस्वरूप रुद्र [प्रभु] से फेंके गये अस्त्र को (न: गोभ्य:) = हमारी गौओं से (दूरं नयतु) = दूर देश में प्राप्त कराए, अर्थात् अरुन्धती के प्रयोग से हमारे गवादि पशु नीरोग हों-यह उन्हें उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त कराए, उन्हें सौभाग्यवाला करे-उनके दूध में यह जीवनशक्ति को स्थापित करनेवाली हो।

    भावार्थ

    अरुन्धती 'विश्वरूपा, सुभगा व जीवला' है। यह हमारे पशुओं को नीरोग बनाए।

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    भाषार्थ

    (विश्वरूपाम्) नाना रूपों वाली (सुभगाम्) उत्तम ऐश्वर्य प्रदान करने वाली, (जीवलाम्) जीवन देने वाली, [सहदेवी औषध] को, (अच्छ) तुम्हारे प्रति, (आवदामि) मैं कहता हूँ। (सा) वह ओषधि (रुद्रस्य) रुलाने वाली विद्युत् के (अस्ताम्) फेंके गए, (हेतिम्) हनन करने वाले वज्र को (न:) हमारी (गोभ्यः) गोओं से, (दूर) दूर (नयतु) ले जाय, रखें। अर्थात् गोशाला का निर्माण इस प्रकार का होना चाहिये कि उस पर विद्युत् का प्रभाव न हो सके।

    टिप्पणी

    [सहदेवी ओषधि दो प्रकार की होती है सहदेवी और सहदेवी बड़ी। सहदेवी के फूल बैंगनी रंग के और बीज काली जीरी के समान होते हैं। इस का पौधा त्रिदोष, क्षय तथा दमा खांसी में लाभदायक होता है, तथा फूल, ज्वर नाशक होते हैं। "बनौषधि चन्द्रोदय" चन्द्रराज भण्डारी, ज्ञान मन्दिर, भानपुरा। यह स्वास्थ्य तथा जीवनरूपी ऐश्वर्य प्रदान करती तथा गौओं को नीरोग करती है]।

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    विषय

    गृह-पत्नी के कर्तव्य, पशुरक्षा और गोपालन।

    भावार्थ

    हम (विश्व-रूपाम्) नाना प्रकार से समस्त पदार्थों को उत्तम रूप से बनानेवाली वा उनको निरीक्षण करनेवाली (जीवलाम्) सब को जीवन प्रदान करनेवाली (सुभगाम्) सौभाग्यशील, ऐश्वर्यवाली स्त्री को (अच्छ वदामसि) बड़ा उत्तम कहते हैं। (सा) वह आनेवाले (रुद्रस्य) रुलानेवाले, रोग आदि कष्टदायक और हिंसक पदार्थों के (हेतिम्) शस्त्र, आघातकारी आयुध को (नः) (गोभ्यः) हमारी गौओं से (दूरं नयतु) दूर करे।

    टिप्पणी

    missing

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    अथर्वा ऋषिः। रुद्र उत मन्त्रोक्ता देवताः। अनुष्टुभः। तृचं सूक्तम्।

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    The Herb Arundhati

    Meaning

    I value and welcome Arundhati, the auspicious, rejuvenating herb of versatile efficacy curative of all forms of ailments and pray may the herb help us keep away the attack of diseases caused by neglect of precautions prescribed by the physician, Rudra, and may the herb help us keep off disease from cows as well.

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    Translation

    I praise the life-giving (herb), having all sorts of forms and bringing good fortune. May it tum the missile hurled by the terrible punisher (rudra) away far from Our cattle.

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    Translation

    I welcome the auspicious medicine which has Many colors, and which is life-giving, let it turn, the deadly Weapon of Rudra, (the diseases created) by the disturbed fire which works out in our digestion and which works out in the outer world) the plague etc. from our limbs and from our cattle’s.

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    Translation

    I extol the auspicious, life-giving, mistress of the house, who nicely examines all household objects. Far from our cattle may she turn the deadly dart of disease.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    ३−(विश्वरूपाम्) विश्वस्य रूपं रचनं यस्यास्ताम् जगद्रूपकर्त्रीम् (सुभगाम्) शोभनैश्वर्यवतीम् (अच्छावदामि) अच्छ सुष्ठु स्वागतेन आवदामि आह्वयामि (जीवलाम्) आतोऽनुपसर्गे कः। पा० ३।२।३। इति जीव+रा दाने−क, रस्य लत्वम्। जीवनदात्रीम्। यद्वा। सिध्मादिभ्यश्च। पा० ५।२।९७। इति जीव−मत्वर्थीयो लच्। जीवनवतीं शक्तिं परमेश्वरम् (सा) शक्तिः (नः) अस्माकम् (रुद्रस्य) अ० २।२७।६। दुःखनाशकस्य परमेश्वरस्य (अस्ताम्) असु क्षेपणे−क्त। क्षिप्ताम् (हेतिम्) ताडनाम् (दूरम्) (नयतु) गमयतु (गोभ्यः) भूमिभ्यः ॥

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