अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 9 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 9/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - जमदग्नि देवता - कामात्मा छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - कामात्मा सूक्त
    पदार्थ -

    (मे) मेरे (तन्वम्) शरीर की और (पादौ) दोनों पैरों की (वाञ्छ) कामना कर, (अक्ष्यौ) दोनों नेत्रों की (वाञ्छ) कामना कर (सक्थ्यौ) दोनों जङ्घाओं की (वाञ्छ) कामना कर। (वृषण्यन्त्याः) ऐश्वर्यवान् पुरुष की इच्छा करती हुयी (ते) तेरी (अक्ष्यौ) दोनों आँखें और (केशाः) केश (कामेन) सुन्दर कामना से (माम्) मुझ को (शुष्यन्तु) सुखावें ॥१॥

    भावार्थ -

    स्त्री पुरुष सब अङ्गों से हृष्ट-पुष्ट और पुरुषार्थी होकर पूर्ण युवा अवस्था में गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने की इच्छा करें ॥१॥

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