अथर्ववेद के काण्ड - 7 के सूक्त 67 के मन्त्र

मन्त्र चुनें

  • अथर्ववेद का मुख्य पृष्ठ
  • अथर्ववेद - काण्ड 7/ सूक्त 67/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - ब्रह्मा देवता - आत्मा छन्दः - पुरःपरोष्णिग्बृहती सूक्तम् - आत्मा सूक्त
    पदार्थ -

    (इन्द्रियम्) इन्द्रत्व [परम ऐश्वर्य] (मा) मुझको (पुनः) अवश्य [वा फिर जन्म में], (आत्मा) आत्मबल, (द्रविणम्) धन (च) और (ब्राह्मणम्) वेदविज्ञान (पुनः) अवश्य [वा परजन्म में] (आ एतु) प्राप्त होवे (धिष्ण्याः) बोलने में चतुर (अग्नयः) विद्वान् लोग (यथास्थाम) यथास्थान [कर्म अनुसार मुझको] (इह) यहाँ (एव) ही (पुनः) अवश्य [वा पर जन्म में] (कल्पयन्ताम्) समर्थ करें ॥१॥

    भावार्थ -

    मनुष्य सदा सुकर्मी होकर इस लोक और परलोक का आनन्द प्राप्त करें ॥१॥ यह मन्त्र ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, पुनर्जन्मविषय, पृष्ठ २०–३ में भी व्याख्यात है ॥

    कृपया कम से कम 20 शब्द लिखें!
    Top