Loading...

मन्त्र चुनें

  • अथर्ववेद का मुख्य पृष्ठ
  • अथर्ववेद - काण्ड 8/ सूक्त 10/ मन्त्र 4
    ऋषि: - अथर्वाचार्यः देवता - विराट् छन्दः - एकपदा साम्नी पङ्क्तिः सूक्तम् - विराट् सूक्त
    26

    ऊर्ज॒ एहि॒ स्वध॑ एहि॒ सूनृ॑त॒ एहीरा॑व॒त्येहीति॑ ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    ऊर्जे॑ । आ । इ॒हि॒ । स्वधे॑ । आ । इ॒हि॒ । सूनृ॑ते । आ । इ॒हि॒ । इरा॑ऽवति । आ । इ॒हि॒ । इति॑ ॥११.४॥


    स्वर रहित मन्त्र

    ऊर्ज एहि स्वध एहि सूनृत एहीरावत्येहीति ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    ऊर्जे । आ । इहि । स्वधे । आ । इहि । सूनृते । आ । इहि । इराऽवति । आ । इहि । इति ॥११.४॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 8; सूक्त » 10; पर्यायः » 2; मन्त्र » 4
    Acknowledgment

    पदार्थ -
    (ऊर्जे) हे बलवती ! (आ इहि) तू आ, (स्वधे) हे धन रखनेवाली ! (आ इहि) तू आ, (सूनृते) हे प्रिय सत्य वाणीवाली ! (आ इहि) तू आ, (इरावति) हे अन्नवाली ! (आ इहि) तू आ, (इति) बस” ॥४॥

    भावार्थ - सब लोक-लोकान्तर और प्राणी विराट् नाम ईश्वरशक्ति का आश्रय लेकर जीवनधारण करते हैं ॥४॥


    Bhashya Acknowledgment

    Meaning -
    O Spirit of food, energy and pranic vitality, come. Come Svadha, spirit of wealth and independence. Come Sunrta, spirit and voice of Truth. Come Iravati, bearer of food and water.


    Bhashya Acknowledgment
    Top