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  • अथर्ववेद - काण्ड 8/ सूक्त 10/ पर्यायः 3/ मन्त्र 1
    ऋषि: - अथर्वाचार्यः देवता - विराट् छन्दः - चतुष्पदा विराडनुष्टुप् सूक्तम् - विराट् सूक्त
    पदार्थ -

    (सा उत् अक्रामत्) वह [विराट्] ऊपर चढ़ी, (सा) वह (वनस्पतीन्) वनस्पतियों [वृक्ष आदि पदार्थों] में (आ अगच्छत्) आयी, (ताम्) उसको (वनस्पतयः) वनस्पतियाँ (अघ्नत) प्राप्त हुईं, (सा) वह (संवत्सरे) संवत्सर [वर्ष काल] में (सम् अभवत्) संयुक्त हुई ॥१॥

    भावार्थ -

    विराट्, ईश्वरशक्ति का प्रादुर्भाव वृक्ष आदि पदार्थों में हैं ॥१॥

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