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  • अथर्ववेद - काण्ड 8/ सूक्त 10/ मन्त्र 15
    ऋषि: - अथर्वाचार्यः देवता - विराट् छन्दः - साम्न्यनुष्टुप् सूक्तम् - विराट् सूक्त
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    तां धृ॒तरा॑ष्ट्र ऐराव॒तोधो॒क्तां वि॒षमे॒वाधो॑क्।

    स्वर सहित पद पाठ

    ताम् । धृ॒तऽरा॑ष्ट्र: । ऐ॒रा॒ऽव॒त: । अ॒धो॒क् । ताम् । वि॒षम् । ए॒व । अ॒धो॒क् ॥१४.१५॥


    स्वर रहित मन्त्र

    तां धृतराष्ट्र ऐरावतोधोक्तां विषमेवाधोक्।

    स्वर रहित पद पाठ

    ताम् । धृतऽराष्ट्र: । ऐराऽवत: । अधोक् । ताम् । विषम् । एव । अधोक् ॥१४.१५॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 8; सूक्त » 10; पर्यायः » 5; मन्त्र » 15
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    पदार्थ -
    (ताम्) उसको (ऐरावतः) भूमिवालों के स्वभाव जाननेवाले (धृतराष्ट्रः) राज्य रखनेवाले पुरुष ने (अधोक्) दुहा है, (ताम्) उस से (एव) ही (विषम्) विष को (अधोक्) दुहा है ॥१५॥

    भावार्थ - नीतिकुशल लोग ईश्वरशक्ति से ही विष की विवेचना करते हैं ॥१५॥


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    Meaning -
    Her, the ruler and protector of the human nation and specialist of the earth and earth products milked to distil the poison, and isolated the poison and discovered the antidote.


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