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सामवेद के मन्त्र

सामवेद - मन्त्रसंख्या 701
ऋषिः - कविर्भार्गवः देवता - पवमानः सोमः छन्दः - जगती स्वरः - निषादः काण्ड नाम -
1

ऋ꣣त꣡स्य꣢ जि꣣ह्वा꣡ प꣢वते꣣ म꣡धु꣢ प्रि꣣यं꣢ व꣣क्ता꣡ पति꣢꣯र्धि꣣यो꣢ अ꣣स्या꣡ अदा꣢꣯भ्यः । द꣡धा꣢ति पु꣣त्रः꣢ पि꣣त्रो꣡र꣢पी꣣च्यां꣢३꣱ ना꣡म꣢ तृ꣣ती꣢य꣣म꣡धि꣢ रोच꣣नं꣢ दि꣣वः꣢ ॥७०१

स्वर सहित पद पाठ

ऋ꣣त꣡स्य꣢ । जि꣣ह्वा꣢ । प꣣वते । म꣡धु꣢꣯ । प्रि꣣य꣢म् । व꣣क्ता꣢ । प꣡तिः꣢꣯ । धि꣣य꣢ । अ꣡स्याः꣢ । अ꣡दा꣢꣯भ्यः । अ । दा꣣भ्यः । द꣡धा꣢꣯ति । पु꣣त्रः꣢ । पु꣣त् । त्रः꣢ । पि꣣त्रोः꣢ । अ꣣पीच्य꣢म् । ना꣡म꣢꣯ । तृ꣣ती꣡य꣢म् । अ꣡धि꣢꣯ । रो꣣चन꣢म् । दि꣣वः꣢ ॥७०१॥


स्वर रहित मन्त्र

ऋतस्य जिह्वा पवते मधु प्रियं वक्ता पतिर्धियो अस्या अदाभ्यः । दधाति पुत्रः पित्रोरपीच्यां३ नाम तृतीयमधि रोचनं दिवः ॥७०१


स्वर रहित पद पाठ

ऋतस्य । जिह्वा । पवते । मधु । प्रियम् । वक्ता । पतिः । धिय । अस्याः । अदाभ्यः । अ । दाभ्यः । दधाति । पुत्रः । पुत् । त्रः । पित्रोः । अपीच्यम् । नाम । तृतीयम् । अधि । रोचनम् । दिवः ॥७०१॥

सामवेद - मन्त्र संख्या : 701
(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 1; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » ; सूक्त » 19; मन्त्र » 2
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 1; खण्ड » 5; सूक्त » 5; मन्त्र » 2
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शब्दार्थ -
(ऋतस्य) सत्यवादी, योगाभ्यासी की (जिह्वा) वाणी (प्रियम् ) हृदय को तृप्त करनेवाले (मधु) आनन्ददायक रस को (पवते) बहाती है (अस्याः धियः) इस सत्य भाषण का (पति) पालक और (वक्ता) सत्य ही बोलनेवाला (अदाभ्य:) दुर्दमनीय होता है, वह किसी से दबाया नहीं जा सकता (पुत्रः) सत्यवादी पुत्र (पित्रो:) माता-पिता की (अपीच्यम्) अप्रसिद्ध अज्ञात (नाम) कीर्ति और यश को (दधाति) प्रकाशित कर देता है, फैला देता है । सत्यवादी पुत्र (तृतीयाम्) तीसरे, परमोत्कृष्ट (दिवः) द्युलोक में भी (अधिरोचनम्) अपने माता-पिता के नाम को रोशन करता है ।

भावार्थ - १. सत्यवादी सदा हृदय को तृप्त करनेवाली मीठी और मधुर वाणी बोलता है। उसके जीवन का आदर्श होता है ‘सत्य, प्रिय और हितकर’ बोलना । वह कभी कटु और तीखा नहीं बोलता । २. पापी और दुराचारी सत्यभाषी को कष्ट देकर भी उसके सत्यभाषणरूप कर्म से पृथक् नहीं कर सकते। आपत्तियाँ और संकट आने पर भी सत्यवादी सत्य ही बोलता है । ३. सत्यवादी पुत्र सत्यभाषण के प्रताप से अपने माता-पिता के अज्ञात नाम को, उनके यश और कीर्ति को चमका देता है । ४. साधारण लोगों की तो बात ही क्या, वह उच्चकोटि के विद्वानों में भी अपने माता-पिता के नाम को फैला देता है ।

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