Loading...

सामवेद के मन्त्र

सामवेद - मन्त्रसंख्या 710
ऋषिः - नृमेध आङ्गिरसः देवता - इन्द्रः छन्दः - ककुबुष्णिक् स्वरः - ऋषभः काण्ड नाम -
1

अ꣢धा꣣꣬ ही꣢꣯न्द्र गिर्वण꣣ उ꣡प꣢ त्वा꣣ का꣡म꣢ ई꣣म꣡हे꣢ ससृ꣣ग्म꣡हे꣢ । उ꣣दे꣢व꣣ ग्म꣡न्त꣢ उ꣣द꣡भिः꣢ ॥७१०॥

स्वर सहित पद पाठ

अ꣡ध꣢꣯ । हि । इ꣣न्द्र । गिर्वणः । गिः । वनः । उ꣡प꣢꣯ । त्वा꣣ । का꣡मे꣢꣯ । ई꣣म꣡हे꣢ । स꣣सृग्म꣡हे꣢ । उ꣣दा꣢ । इ꣣व । ग्म꣡न्तः꣢꣯ । उ꣣द꣡भिः꣢ ॥७१०॥


स्वर रहित मन्त्र

अधा हीन्द्र गिर्वण उप त्वा काम ईमहे ससृग्महे । उदेव ग्मन्त उदभिः ॥७१०॥


स्वर रहित पद पाठ

अध । हि । इन्द्र । गिर्वणः । गिः । वनः । उप । त्वा । कामे । ईमहे । ससृग्महे । उदा । इव । ग्मन्तः । उदभिः ॥७१०॥

सामवेद - मन्त्र संख्या : 710
(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 1; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » ; सूक्त » 23; मन्त्र » 1
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 1; खण्ड » 6; सूक्त » 4; मन्त्र » 1
Acknowledgment

Meaning -
And O lord lover of song and celebration, Indra, we send up vaulting voices of ambition, adoration and prayer to you like wave on waves of the flood rolling upon the sea. (Rg. 8-98-7)

इस भाष्य को एडिट करें
Top