Sidebar
सामवेद के मन्त्र
सामवेद - मन्त्रसंख्या 1768
ऋषिः - नृमेधो वामदेवो वा
देवता - इन्द्रः
छन्दः - द्विपदा गायत्री
स्वरः - षड्जः
काण्ड नाम -
6
ए꣣ष꣢ ब्र꣣ह्मा꣢꣫ य ऋ꣣त्वि꣢य꣣ इ꣢न्द्रो꣣ ना꣡म꣢ श्रु꣣तो꣢ गृ꣣णे ॥१७६८॥
स्वर सहित पद पाठए꣣षः꣢ । ब्र꣡ह्मा꣢ । यः । ऋ꣣त्वि꣡यः꣢ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । ना꣡म꣢꣯ । श्रु꣣तः꣢ । गृ꣣णे꣢ ॥१७६८॥१
स्वर रहित मन्त्र
एष ब्रह्मा य ऋत्विय इन्द्रो नाम श्रुतो गृणे ॥१७६८॥
स्वर रहित पद पाठ
एषः । ब्रह्मा । यः । ऋत्वियः । इन्द्रः । नाम । श्रुतः । गृणे ॥१७६८॥१
सामवेद - मन्त्र संख्या : 1768
(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 9; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » ; सूक्त » 2; मन्त्र » 1
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 20; खण्ड » 1; सूक्त » 2; मन्त्र » 1
Acknowledgment
(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 9; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » ; सूक्त » 2; मन्त्र » 1
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 20; खण्ड » 1; सूक्त » 2; मन्त्र » 1
Acknowledgment
Meaning -
I praise cloud known as the god of rain, which develops through Yajna in different seasons.
Translator Comment -
See verse 438.