Loading...

सामवेद के मन्त्र

सामवेद - मन्त्रसंख्या 1770
ऋषिः - नृमेधो वामदेवो वा देवता - इन्द्रः छन्दः - द्विपदा गायत्री स्वरः - षड्जः काण्ड नाम -
4

वि꣢ स्रु꣣त꣢यो꣣ य꣡था꣢ प꣣थ꣢꣫ इन्द्र त्वद्यन्तु रातयः ॥१७७०॥

स्वर सहित पद पाठ

वि । स्रु꣣त꣡यः꣢ । य꣡था꣢꣯ । प꣣थः꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯ । त्वत् । य꣣न्तु । रात꣡यः꣢ ॥१७७०॥


स्वर रहित मन्त्र

वि स्रुतयो यथा पथ इन्द्र त्वद्यन्तु रातयः ॥१७७०॥


स्वर रहित पद पाठ

वि । स्रुतयः । यथा । पथः । इन्द्र । त्वत् । यन्तु । रातयः ॥१७७०॥

सामवेद - मन्त्र संख्या : 1770
(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 9; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » ; सूक्त » 2; मन्त्र » 3
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 20; खण्ड » 1; सूक्त » 2; मन्त्र » 3
Acknowledgment

Meaning -
O King, just as from the main channel, streamlets flow in different direction, so do multifarious bounties flow from thee to thy devotees!

इस भाष्य को एडिट करें
Top