Sidebar
सामवेद के मन्त्र
सामवेद - मन्त्रसंख्या 504
ऋषिः - कश्यपो मारीचः
देवता - पवमानः सोमः
छन्दः - गायत्री
स्वरः - षड्जः
काण्ड नाम - पावमानं काण्डम्
1
वृ꣡षा꣢ सोम द्यु꣣मा꣡ꣳ अ꣢सि꣣ वृ꣡षा꣢ देव꣣ वृ꣡ष꣢व्रतः । वृ꣡षा꣣ ध꣡र्मा꣢णि दध्रिषे ॥५०४॥
स्वर सहित पद पाठवृ꣡षा꣢꣯ । सो꣣म । द्युमा꣢न् । अ꣣सि । वृ꣡षा꣢꣯ । दे꣣व । वृ꣡ष꣢꣯व्रतः । वृ꣡ष꣢꣯ । व्र꣣तः । वृ꣡षा꣢꣯ । ध꣡र्मा꣢꣯णि । द꣣ध्रिषे ॥५०४॥
स्वर रहित मन्त्र
वृषा सोम द्युमाꣳ असि वृषा देव वृषव्रतः । वृषा धर्माणि दध्रिषे ॥५०४॥
स्वर रहित पद पाठ
वृषा । सोम । द्युमान् । असि । वृषा । देव । वृषव्रतः । वृष । व्रतः । वृषा । धर्माणि । दध्रिषे ॥५०४॥
सामवेद - मन्त्र संख्या : 504
(कौथुम) पूर्वार्चिकः » प्रपाठक » 6; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » 2; मन्त्र » 8
(राणानीय) पूर्वार्चिकः » अध्याय » 5; खण्ड » 4;
Acknowledgment
(कौथुम) पूर्वार्चिकः » प्रपाठक » 6; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » 2; मन्त्र » 8
(राणानीय) पूर्वार्चिकः » अध्याय » 5; खण्ड » 4;
Acknowledgment
Mazmoon - کلامِ الہٰی کے پھیلاؤ سے دھرم کا جماؤ
Lafzi Maana -
پیارے ایشور بھگت تُو علمِ عرفاں سے منّور ہے، لہٰذا اُٹھ کر اپنے روحانی وعظوں یا اُپدیشوں سے اس صحیفئہ الہٰی کو چاروں طرف پھیلا۔ یہ تیرا برت (عہد) ہے، پرمیشور کے اُپدیشوں کی ورشا کرنا، اسی سے دُنیا میں دھرم کرم کا جماؤ ہوگا۔
Tashree -
پیارے اِیشور بھگت تجھ میں علمِ عرفاں نُور ہے، اِس کو پھیلانے کا تیرا عہد ہے دستُور ہے۔
इस भाष्य को एडिट करें