यजुर्वेद - अध्याय 20/ मन्त्र 7
ऋषिः - प्रजापतिर्ऋषिः
देवता - राजा देवता
छन्दः - निचृद गायत्री
स्वरः - षड्जः
166
बा॒हू मे॒ बल॑मिन्द्रि॒यꣳ हस्तौ॑ मे॒ कर्म॑ वी॒र्यम्। आ॒त्मा क्ष॒त्रमुरो॒ मम॑॥७॥
स्वर सहित पद पाठबा॒हूऽइति॑ बा॒हू। मे॒। बल॑म्। इ॒न्द्रि॒यम्। हस्तौ॑। मे॒। कर्म॑। वी॒र्य᳖म्। आ॒त्मा। क्ष॒त्रम्। उरः॑। मम॑ ॥७ ॥
स्वर रहित मन्त्र
बाहू मे बलमिन्द्रियँ हस्तौ मे कर्म वीर्यम् । आत्मा क्षत्रमुरो मम ॥
स्वर रहित पद पाठ
बाहूऽइति बाहू। मे। बलम्। इन्द्रियम्। हस्तौ। मे। कर्म। वीर्यम्। आत्मा। क्षत्रम्। उरः। मम॥७॥
भाष्य भाग
संस्कृत (1)
विषयः
पुनस्तमेव विषयमाह॥
अन्वयः
हे मनुष्याः! मे बलमिन्द्रियं बाहू मे कर्म वीर्य्यं हस्तौ ममात्मा उरो हृदयं च क्षत्रमस्तु॥७॥
पदार्थः
(बाहू) भुजौ (मे) मम (बलम्) (इन्द्रियम्) धनम् (हस्तौ) (मे) (कर्म) (वीर्य्यम्) पराक्रमः (आत्मा) स्वयम्भूर्जीवः (क्षत्रम्) क्षताद् रक्षकम् (उरः) हृदयम् (मम)॥७॥
भावार्थः
राजपुरुषैरात्मान्तःकरणबाहुबलं विधाय सुखमुन्नेयम्॥७॥
हिन्दी (3)
विषय
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥
पदार्थ
हे मनुष्यो! (मे) मेरा (बलम्) बल और (इन्द्रियम्) धन (बाहू) भुजारूप (मे) मेरा (कर्म) कर्म और (वीर्य्यम्) पराक्रम (हस्तौ) हाथ रूप (मम) मेरा (आत्मा) स्वस्वरूप और (उरः) हृदय (क्षत्रम्) अति दुःख से रक्षा करनेहारा हो॥७॥
भावार्थ
राजपुरुषों को योग्य है कि आत्मा, अन्तःकरण और बाहुओं के बल को उत्पन्न कर सुख बढ़ावें॥७॥
विषय
पदाधिकारों और अध्यात्म शक्तियों की तुलना ।
भावार्थ
(इन्द्रियं बलम् मे बाहू) इन्द्र, सेनापति का समस्त बल मेरे बाहू हैं । (वीर्यं कर्म मे हस्तौ ) वीरोचित कर्म मेरे हाथ हैं । (क्षत्रम् मम आत्मा उरः च) राष्ट्र को क्षति से बचाने वाला क्षात्रबल मेरा आत्मा और विशेष कर छाती के समान है । अध्यात्म में - भुजाओं में मेरे बल हो, हाथों में काम करने का सामर्थ्य और सत्कर्म हो, आत्मा बलवान् हो, छाती में सामर्थ्य हो ।
ऋषि | देवता | छन्द | स्वर
प्रजापतिः । राजा । निचृद् गायत्री । षड्जः ॥
विषय
बाहू+हस्तौ + उर:
पदार्थ
१. (बलम्) = शरीर का बल तथा (इन्द्रियम्) = एक-एक इन्द्रिय की शक्ति ही (मे बाहू) = मेरी भुजाएँ हों, अर्थात् मैं बल और इन्द्रियों को भुजा के रूप में देखूं । २. (कर्म) = निरन्तर क्रियाशीलता और (वीर्यम्) = क्रियाशीलता से उत्पन्न वीर्य मे हस्तौ मेरे हाथ हों। ३. (मम) = मेरा (आत्मा) = आत्मिक बल तथा (क्षत्रम्) = क्षतों से बचानेवाला क्षात्रबल ही (उर:) = मेरी छाती व वक्षःस्थल हो ।
भावार्थ
भावार्थ - राजा व्रत लेता है कि मैं [क] बल व इन्द्रिय-शक्ति को ही अपनी भुजाएँ समझँगा। [ख] कर्म व कर्मजनित शक्ति को हाथ समझँगा तथा [ग] आत्मिक बल व क्षात्रबल को ही उर: स्थनीय मानूँगा ।
मराठी (2)
भावार्थ
राजपुरुषांनी आत्मा, अंतःकरण व बाहुबल यांनी सुख वाढवावे.
विषय
पुन्हा तोच विषय -
शब्दार्थ
शब्दार्थ - (राजा वा राजपुरूषाची उक्ती) हे मनुष्यानो, (मे) माझे (बलम्) बळ आणि (इन्द्रियम्) माझे धन (तुमचे रक्षण करणारे असो) माझ्या (बाहू) दोन्ही भुजा (मे) माझे वा मी करीत असलेले कर्म (वीर्य्यम्) पराक्रमपूर्ण असावेत. माझे (हस्तौ) हाथ, (मम) माझा (आत्मा) स्वस्वरूप आणि माझे (उरः) हृदय (क्षत्रम्) दुःख व संकटांपासून सर्व प्रजाजनांचे रक्षण करणारे असावे. (अशी मी अपेक्षा व्यक्त करतो) ॥7॥
भावार्थ
भावार्थ – राजपुरूषांसाठी आवश्यक आहे की त्यांनी आत्मा, अन्तःकरण आणि बाहूंची शक्ती वाढविण्याचे सतत यत्न करावेत आणि त्याद्वारे सुखी व्हावे ॥7॥
इंग्लिश (3)
Meaning
Power and wealth are my arms, deed and heroism are my hands. Soul and heart are my shield against danger.
Meaning
May my arms, strength and prowess, my hands, actions and heroism, my heart and my very soul be for the supremacy and sovereignty of the world order.
Translation
Strength and wealth are my two arms; activity and aggressiveness are my two hands; defending the weak is my breast as well as soul. (1)
Notes
Indriyam, ऐश्वर्यं धनं, wealth. Ksatram, defending the weak.
बंगाली (1)
विषय
পুনস্তমেব বিষয়মাহ ॥
পুনঃ সেই বিষয়কে পরবর্ত্তী মন্ত্রে বলা হইয়ৈছে ॥
पदार्थ
পদার্থঃ-হে মনুষ্যগণ ! (মে) আমার (বলম্) বল ও (ইন্দ্রিয়ম্) ধন (বাহূ) ভুজরূপ (মে) আমার (কর্ম) কর্ম ও (বীর্য়্যম্) পরাক্রম (হস্তৌ) হস্তরূপ (মম) আমার (আত্মা) স্বস্বরূপ এবং (উরঃ) হৃদয় (ক্ষত্রম্) অতি দুঃখ হইতে রক্ষাকারী হউক ॥ ৭ ॥
भावार्थ
ভাবার্থঃ- রাজপুরুষদিগের কর্ত্তব্য যে, আত্মা অন্তঃকরণ ও বাহুদিগের বল উৎপন্ন করিয়া সুখ বৃদ্ধি করুক ॥ ৭ ॥
मन्त्र (बांग्ला)
বা॒হূ মে॒ বল॑মিন্দ্রি॒য়ꣳ হস্তৌ॑ মে॒ কর্ম॑ বী॒র্য়᳖ম্ ।
আ॒ত্মা ক্ষ॒ত্রমুরো॒ মম॑ ॥ ৭ ॥
ऋषि | देवता | छन्द | स्वर
বাহূ ইত্যস্য প্রজাপতির্ঋষিঃ । রাজা দেবতা । নিচৃদ্ গায়ত্রী ছন্দঃ ।
ষড্জঃ স্বরঃ ॥
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