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अथर्ववेद के काण्ड - 20 के सूक्त 15 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 15/ मन्त्र 5
    ऋषिः - गोतमः देवता - इन्द्रः छन्दः - त्रिष्टुप् सूक्तम् - सूक्त-१५
    53

    भूरि॑ त इन्द्र वी॒र्य तव॑ स्मस्य॒स्य स्तो॒तुर्म॑घव॒न्काम॒मा पृ॑ण। अनु॑ ते॒ द्यौर्बृ॑ह॒ती वी॒र्यं मम इ॒यं च॑ ते पृथि॒वी ने॑म॒ ओज॑से ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    भूरि॑ । ते॒ । इ॒न्द्र॒ । वी॒र्य॑म् । तव॑ । स्म॒सि॒ । अ॒स्य॒ । स्तो॒तु: । म॒घ॒ऽव॒न् । काम॑म् । आ । पृ॒ण॒ ॥ अनु॑ । ते॒ । द्यौ: । बृ॒ह॒ती । वी॒र्य॑म् । म॒मे॒ । इ॒यम् । च॒ । ते॒ । पृ॒थ‍ि॒वी । मे॒मे॒ । ओज॑से ॥१५.५॥


    स्वर रहित मन्त्र

    भूरि त इन्द्र वीर्य तव स्मस्यस्य स्तोतुर्मघवन्काममा पृण। अनु ते द्यौर्बृहती वीर्यं मम इयं च ते पृथिवी नेम ओजसे ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    भूरि । ते । इन्द्र । वीर्यम् । तव । स्मसि । अस्य । स्तोतु: । मघऽवन् । कामम् । आ । पृण ॥ अनु । ते । द्यौ: । बृहती । वीर्यम् । ममे । इयम् । च । ते । पृथ‍िवी । मेमे । ओजसे ॥१५.५॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 20; सूक्त » 15; मन्त्र » 5
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    सभाध्यक्ष के गुणों का उपदेश।

    पदार्थ

    (इन्द्र) हे इन्द्र ! [महाप्रतापी राजन्] (ते) तेरा (वीर्यम्) पराक्रम (भूरि) बहुत है, हम (ते) तेरे [प्रजा] (स्मसि) हैं, (मघवन्) हे महाधनी ! (अस्य) इस (स्तोतुः) स्तुति करनेवाले की (कामम्) कामना को (आ) सब ओर से (पृण) तृप्त कर। (ते) तेरे (वीर्यम् अनु) पराक्रम के पीछे (बृहती) बड़ा (द्यौः) आकाश (ममे) नापा गया है, (च) और (ते) तेरे (ओजसे) बल के लिये (इयम्) यह (पृथिवी) पृथिवी (नेमे) झुकी है ॥॥

    भावार्थ

    जो विज्ञानी राजा प्रजा को प्रसन्न रखकर विद्वानों का उचित सत्कार करता है, वह वायु विमान आदि से आकाश को, तथा स्थल और जलयान आदि से पृथिवी को वश में करके राज्य की उन्नति करता है ॥॥

    टिप्पणी

    −(भूरि) बहु (ते) तव (इन्द्र) हे प्रतापिन् राजन् (वीर्यम्) पराक्रमः (ते) तव (स्मसि) वयं प्रजाः स्मः (अस्य) (स्तोतुः) गुणप्रकाशकस्य (मघवन्) हे बहुधन (कामम्) अभिलाषम् (पृण) पृण प्रीणने। तर्पय (अनु) अनुसृत्य (ते) तव (द्यौः) आकाशः (बृहती) महती (वीर्यम्) पराक्रमम् (ममे) माङ् माने शब्दे च-लिट्। परिमिता बभूव (इयम्) दृश्यमाना (च) (ते) तव (पृथिवी) भूमिः (नेमे) णम प्रह्वत्वे-लिट्। प्रह्वी नम्रा बभूव (ओजसे) बलाय ॥

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    विषय

    'अनन्त-शक्ति' प्रभु

    पदार्थ

    १. हे (इन्द्र) = सर्वशक्तिमन् प्रभो! (ते वीर्यम्) = आपका पराक्रम (भूरि) = महान है। (तव स्मसि) = हम आपके ही तो हैं। हे (मघवन्) = ऐश्वर्यशालिन् प्रभो! (अस्य स्तोतुः कामम् आपृण) = इस स्तोता की कामना को पूरण कीजिए। २. यह (बृहती द्यौः) = विशाल दयुलोक (ते वीर्यम् अनु) = आपके पराक्रम से ही (ममे) = निर्मित हुआ है। (इयं च पृथिवी) = और यह पृथिवी (ते) = आपके ओजसे (नेमे) = ओज के लिए नतमस्तक होती है। वस्तुत: ये द्यावापृथिवी आपकी महिमा का ही प्रतिपादन कर रहे हैं।

    भावार्थ

    प्रभु की शक्ति अनन्त है। प्रभु ही स्तोता की कामना को पूरण करते हैं। ये द्यावा पृथिवी प्रभु की हो महिमा हैं।

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    भाषार्थ

    (इन्द्र) हे परमेश्वर! (ते) आपका (वीर्यम्) सामर्थ्य (भूरि) महान् है। (तव) आपके ही (स्मसि) हम हैं। (मघवन्) हे ऐश्वर्यशाली! (अस्य स्तोतुः) इस स्तुतिकर्त्ता की (कामम्) मोक्ष-कामना को (आ पृणः) पूर्ण कर दीजिए। आपका बड़ा सामर्थ्य है। (बृहती द्यौः) महान् द्युलोक (ते वीर्यम्) आपके सामर्थ्य का (अनु) अनुचर बना हुआ है। (मम) हे मेरे परमेश्वर! (न) जैसे कि (इयम्) यह (ते) आपकी (पृथिवी) पृथिवी आपकी अनुचरी बनी हुई है। (इमे) ये दोनों लोक (ओजसे) आपके ओज को लक्ष्य करके आपके अनुचर बने हुए हैं।

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    विषय

    विद्युत् राजा और परमेश्वर

    भावार्थ

    हे (इन्द्र) इन्द्र ! राजन् ! परमेश्वर ! (तव वीर्यम्) तेरा वीर्य, सामर्थ्य (भूरि) विद्युत् के समान ही महान् है। (तव स्मसि) हम तेरे ही हैं। तू हे (मघवन्) ऐश्वर्यवन् ! (अस्य स्तोतुः) इस स्तुतिशील विद्वान् पुरुष के (कामम्) अभिलाषा को (आ पृण) पूर्ण कर। (ते वीर्यम् अनु) तेरे ही बलपर (बृहती द्यौः) यह बड़ी भारी द्यौ, आकाश में स्थित तेजोमय सृष्टि (ममे) बनी है। और (इयं च पृथिवी) यह पृथिवी भी (ते प्रोजसे) तेरे ही पराक्रम के आगे (नेमे) झुकती है। राजा, विद्युत्, ईश्वर सबके पक्ष में समान है।

    टिप्पणी

    missing

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    गोतमः ऋषिः। इन्द्रो देवता। त्रिष्टुभः। षडृचं सूक्तम्।

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Indr a Devata

    Meaning

    Great is your power and splendour, Indra. We are yours, under your law and shelter. Lord of glory, listen to this devotee and grant his prayer. The vast heaven acknowledges and celebrates your power and glory. This earth too does homage to your might and grandeur.

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    Translation

    Great is the power of this electricity, we depend on this, this great means of acquiring wealth fulfils the desires of its admirers and, utilizers. The lofty heaven measures out its strength depending on this and this globe also bows down to its power.

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    Translation

    Great is the power of this electricity, we depend on this, this great means of acquiring wealth fulfils the desires of its admirers and utilizes. The lofty heaven measures out its strength depending on this and this globe also bows down to its power.

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    Translation

    Far Great is Thy Prowess, O mighty Lord, we are Thine. O Lord of Riches, fulfils the desire of this devotee of Thine. These vast heavens are mere creations of Thy Energy. This earth also bows to Thy splendour.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    −(भूरि) बहु (ते) तव (इन्द्र) हे प्रतापिन् राजन् (वीर्यम्) पराक्रमः (ते) तव (स्मसि) वयं प्रजाः स्मः (अस्य) (स्तोतुः) गुणप्रकाशकस्य (मघवन्) हे बहुधन (कामम्) अभिलाषम् (पृण) पृण प्रीणने। तर्पय (अनु) अनुसृत्य (ते) तव (द्यौः) आकाशः (बृहती) महती (वीर्यम्) पराक्रमम् (ममे) माङ् माने शब्दे च-लिट्। परिमिता बभूव (इयम्) दृश्यमाना (च) (ते) तव (पृथिवी) भूमिः (नेमे) णम प्रह्वत्वे-लिट्। प्रह्वी नम्रा बभूव (ओजसे) बलाय ॥

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    बंगाली (2)

    मन्त्र विषय

    সভাধ্যক্ষগুণোপদেশঃ

    भाषार्थ

    (ইন্দ্র) হে ইন্দ্র ! [মহাপ্রতাপী রাজন্] (তে) তোমার (বীর্যম্) পরাক্রম (ভূরি) অনেক, আমরা (তে) তোমার [প্রজা] (স্মসি) হই, (মঘবন্) হে মহাধনী! (অস্য) এই (স্তোতুঃ) প্রশংসাকারীদের (কামম্) কামনা (আ) সর্বদিক হতে (পৃণ) তৃপ্ত করো। (তে) তোমার (বীর্যম্ অনু) পরাক্রমের অনুকরণে (বৃহতী) বৃহৎ (দ্যৌঃ) আকাশ (মমে) পরিমিত হয়েছে, (চ) এবং (তে) তোমার (ওজসে) বলের জন্য (ইয়ম্) এই (পৃথিবী) পৃথিবী (নেমে) নম্র হয়েছে॥৫॥

    भावार्थ

    যে বিজ্ঞানী রাজা, প্রজাদের প্রসন্ন করে, বিদ্বানগণের উচিত সৎকার করে, সে বায়ুবিমান আদি দ্বারা আকাশকে, তথা স্থল ও জলযান আদি দ্বারা পৃথিবীকে বশবর্তী করে রাজ্যের উন্নতি করে/করুক॥৫॥

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    भाषार्थ

    (ইন্দ্র) হে পরমেশ্বর! (তে) আপনার (বীর্যম্) সামর্থ্য (ভূরি) মহান্। (তব) আপনারই (স্মসি) আমরা । (মঘবন্) হে ঐশ্বর্যশালী! (অস্য স্তোতুঃ) এই স্তুতিকর্ত্তার (কামম্) মোক্ষ-কামনা (আ পৃণঃ) পূর্ণ করুন। আপনার বড়ো সামর্থ্য আছে। (বৃহতী দ্যৌঃ) মহান্ দ্যুলোক (তে বীর্যম্) আপনার সামর্থ্যের (অনু) অনুচর। (মম) হে আমার পরমেশ্বর! (ন) যেমন (ইয়ম্) এই (তে) আপনার (পৃথিবী) পৃথিবী আপনার অনুচরী হয়ে আছে। (ইমে) এই দুই লোক (ওজসে) আপনার তেজ/সামর্থ্য লক্ষ্য করে আপনার অনুচর হয়ে আছে।

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