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अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 88 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 88/ मन्त्र 2
    ऋषिः - अथर्वा देवता - ध्रुवः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - ध्रुवोराजा सूक्त
    88

    ध्रु॒वं ते॒ राजा॒ वरु॑णो ध्रु॒वम्दे॒वो बृह॒स्पतिः॑। ध्रु॒वं त॒ इन्द्र॒श्चाग्निश्च॑ रा॒ष्ट्रं धा॑रयतां ध्रु॒वम् ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    ध्रु॒वम् । ते॒ । राजा॑ । वरु॑ण: । ध्रु॒वम् । दे॒व: । बृह॒स्पति॑: । ध्रु॒वम् । ते॒ । इन्द्र॑: । च॒ । अ॒ग्नि: । च॒ । रा॒ष्ट्रम् । धा॒र॒य॒ता॒म् । ध्रु॒वम् ॥८८.२॥


    स्वर रहित मन्त्र

    ध्रुवं ते राजा वरुणो ध्रुवम्देवो बृहस्पतिः। ध्रुवं त इन्द्रश्चाग्निश्च राष्ट्रं धारयतां ध्रुवम् ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    ध्रुवम् । ते । राजा । वरुण: । ध्रुवम् । देव: । बृहस्पति: । ध्रुवम् । ते । इन्द्र: । च । अग्नि: । च । राष्ट्रम् । धारयताम् । ध्रुवम् ॥८८.२॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 6; सूक्त » 88; मन्त्र » 2
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    राजतिलक यज्ञ के लिये उपदेश।

    पदार्थ

    (राजा) सब का राजा (वरुणः) वरुण, सेवनीय परमेश्वर (ते) तेरे लिये (ते) तेरे (राष्ट्रम्) राज्य को (ध्रुवम्) स्थिर, (देवः) प्रकाशमान (बृहस्पतिः) बड़े-बड़े लोकों का पालन करनेवाला परमात्मा (ध्रुवम्) स्थिर, (च) और (इन्द्रः) सम्पूर्ण ऐश्वर्यवाला जगदीश्वर (ध्रुवम्) स्थिर, (च) और (अग्निः) सर्वव्यापक ईश्वर (ध्रुवम्) स्थिर (धारयताम्) रक्खे ॥२॥

    भावार्थ

    बली प्रतापी राजा परमात्मा की शासन शक्ति विचार कर प्रजापालन में सदा कटिबद्ध रहे ॥२॥

    टिप्पणी

    २−(ध्रुवम्) स्थिरम्। दृढम् (ते) तुभ्यम् (राजा) सर्वेश्वरः (वरुणः) सेवनीयः परमेश्वरः (देवः) प्रकाशमानः (बृहस्पतिः) बृहतां लोकानां पालकः (ते) तव (इन्द्रः) परमैश्वर्यवान् परमेश्वरः (च) (अग्निः) सर्वव्यापक ईश्वरः (च) (राष्ट्रम्) राज्यम् (धारयताम्) धारयतु। रक्षतु ॥

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    विषय

    'वरुण, बृहस्पति, इन्द्र, अग्नि' द्वारा राष्ट्रधारण

    पदार्थ

    १. हे राजन्! (ते राष्ट्रम्) = तेरे इस राष्ट्र को (राजा) = तेजस्विता से (दीप्त वरुण:) = पाप से निवारण करनेवाला आरक्षी-[पुलिस]-विभाग का यह अध्यक्ष (ध्रुवम्) = स्थिरता से धारण करे। (देव:) = यह दिव्य गुणोंवाला-देववृत्तिवाला (बृहस्पति:) = ज्ञानी-मुख्य सचिव (ध्रुव:) = ध्रुवता से धारण करे। २. (इन्द्रः च) = शत्रुओं का विद्रावक सेनापति (ते राष्ट्रम्) = तेरे राष्ट्र को (ध्रुवम्) = ध्रुवता से धारण करे। (अग्निः च) = और राष्ट्र की उन्नति का विचार करनेवाला अध्यक्ष तेरे राष्ट्र को (ध्रुवं धारयताम्) = ध्रुवता से धारण करे।

    भावार्थ

    राजा के राष्ट्र को 'वरुण, बृहस्पति, इन्द्र व अग्नि' आदि ध्रुवता से धारण करनेवाले हों।

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    भाषार्थ

    [हे प्रजाजन !] (ते) तेरे (राष्ट्रम) राष्ट्र को (वरुणः राजा) राष्ट्राधिपति राजा (ध्रुवम्) स्थिर करे, (देव:) दिव्पगुणी (बृहस्पति:) साम्राज्य की बड़ी सेना का अधिपति (ध्रुवम्) स्थिर करे। (ते) तेरे (राष्ट्रम्) राष्ट्र को (इन्द्रः) सम्राट् (ध्रुवम्) स्थिर रूप में (च) और (अग्निः) साम्राज्य प्रधानमन्त्री– ये दोनों (धारयताम्) धारित करें।

    टिप्पणी

    [साम्रज्य के प्रत्येक राष्ट्र का धारण-पोषण राष्ट्रपति वरुणनामक राजा, तथा साम्राज्य के अधिकारी मिल कर करें। 'इन्द्रश्च सम्राट वरुणश्च राजा' (यजु० ८।३७) बृहस्पति: (यजु० १७।४०)। अग्नि:= अग्रणीर्भवति (निरुक्त ७।४।१४)]।

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    विषय

    राजा को ध्रुव होने का उपदेश।

    भावार्थ

    हे राजन् ! (ते) तेरे (राष्ट्रम्) राष्ट्र को (राजा वरुणः) सब का राजा, वह सर्वश्रेष्ठ प्रभु (ध्रुवम्) स्थिर करे। (देवः बृहस्पतिः) वही समस्त विशाल लोकों का पालक, परम देव तेरे राष्ट्र को (ध्रुवम्) स्थिर करे। (इन्द्रः च) वह ऐश्वर्यशील और (अग्निः च) ज्ञानस्वरूप प्रभु (ते) तेरे राष्ट्र को (ध्रुवं धारयताम्) स्थिर रुप से धारण करे। अथवा वरुण, बृहस्पति, इन्द्र, अग्नि ये राष्ट्र के विशेष शासकों के पद हैं। वरुण—पोलीस विभाग का अध्यक्ष। बृहस्पति—मुख्य सचिव। इन्द्र—सेनापति। अग्नि—नायक।

    टिप्पणी

    missing

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    अथर्वा ऋषिः। ध्रुवो देवता। १-२ अनुष्टुभौ, ३ त्रिष्टुप्। तृचं सूक्तम्॥

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Ruler’s Stability

    Meaning

    May the cosmic ruler Varuna, lord of justice and discrimination between truth and untruth, help you maintain the social order in a steady state. May self- refulgent Brhaspati, lord of universal knowledge and boundless space bless you with steadiness. May Indra, lord omnipotent, and Agni, leading light of life, keep you firm and steady, and bless you to maintain the Rashtra firmly in a stable and inviolable state.

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    Translation

    May the sovereign venerable Lord be firm for you and the victorious (devah) Lord supreme (Brhaspati) for you be firm. May the resplendent Lord and the adorable Lord keep your kingdom firm.

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    Translation

    Let constant resplendent varuna, the air, and mighty constant space make your Kingdom constant and firm, O King! and let the constant sun and firm universal fire keep your Kingdom steadfast.

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    Translation

    O King, may the Most Exalted God, the Protector of all vast worlds, the Glorious, Omniscient God, preserve thy steadfast reign!

    Footnote

    Varuna, Brihaspati, Indra, Agni are the names of officials of the state, who work for its safety and advancement. (1) Varuna: Head of the Police Department. (2) Brihaspati: Prime Minister. (3) Indra: Commander-in-chief. (4) Agni: Speaker of the Assembly.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    २−(ध्रुवम्) स्थिरम्। दृढम् (ते) तुभ्यम् (राजा) सर्वेश्वरः (वरुणः) सेवनीयः परमेश्वरः (देवः) प्रकाशमानः (बृहस्पतिः) बृहतां लोकानां पालकः (ते) तव (इन्द्रः) परमैश्वर्यवान् परमेश्वरः (च) (अग्निः) सर्वव्यापक ईश्वरः (च) (राष्ट्रम्) राज्यम् (धारयताम्) धारयतु। रक्षतु ॥

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