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सामवेद के मन्त्र
सामवेद - मन्त्रसंख्या 275
ऋषिः - इरिम्बिठिः काण्वः
देवता - इन्द्रः
छन्दः - बृहती
स्वरः - मध्यमः
काण्ड नाम - ऐन्द्रं काण्डम्
1
वा꣡स्तो꣢ष्पते ध्रु꣣वा꣡ स्थूणाꣳ स꣢꣯त्रꣳ सो꣣म्या꣡ना꣢म् । द्र꣣प्सः꣢ पु꣣रां꣢ भे꣢त्ता꣡ शश्व꣢꣯तीना꣣मि꣢न्द्रो꣣ मु꣡नी꣢ना꣣ꣳ स꣡खा꣢ ॥२७५॥
स्वर सहित पद पाठवा꣡स्तोः꣢꣯ । प꣣ते । ध्रुवा꣢ । स्थू꣡णा꣢꣯ । अँ꣡सत्रम् । सो꣣म्या꣡ना꣢म् । द्र꣣प्सः꣢ । पु꣣रा꣢म् । भे꣣त्ता꣢ । श꣡श्व꣢꣯तीनाम् । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । मु꣡नी꣢꣯नाम् । स꣡खा꣢꣯ । स । खा꣣ ॥२७५॥
स्वर रहित मन्त्र
वास्तोष्पते ध्रुवा स्थूणाꣳ सत्रꣳ सोम्यानाम् । द्रप्सः पुरां भेत्ता शश्वतीनामिन्द्रो मुनीनाꣳ सखा ॥२७५॥
स्वर रहित पद पाठ
वास्तोः । पते । ध्रुवा । स्थूणा । अँसत्रम् । सोम्यानाम् । द्रप्सः । पुराम् । भेत्ता । शश्वतीनाम् । इन्द्रः । मुनीनाम् । सखा । स । खा ॥२७५॥
सामवेद - मन्त्र संख्या : 275
(कौथुम) पूर्वार्चिकः » प्रपाठक » 3; अर्ध-प्रपाठक » 2; दशतिः » 4; मन्त्र » 3
(राणानीय) पूर्वार्चिकः » अध्याय » 3; खण्ड » 5;
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(कौथुम) पूर्वार्चिकः » प्रपाठक » 3; अर्ध-प्रपाठक » 2; दशतिः » 4; मन्त्र » 3
(राणानीय) पूर्वार्चिकः » अध्याय » 3; खण्ड » 5;
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Mazmoon - سُورج چندر وغیرہ نظامِ شمسی کا بسیرا
Lafzi Maana -
(واستو شپتے) سُورج چاند تاروں کو بسانے والے خانئہ دُنیا اِیشور! (دُھرو اسُتھونا) آپ اِس سنسار کے کھمبے ہو کر سہارا دے رہے ہو اور (سومیا نام انس ترم) عابدوں کے حقیقی غلاف یا زرہ بکتر ہو، (درپسیہ بھتیا شاسوتی نام پُرام) ازلی ابدی انسانوں کے ساتھ لگے ہوئے زندگی موت کے بندھنوں کو کاٹ کر نجات دلانے والے آپ ہو، (اندر سُنی نام سَکھا) اور عارفوں کے سچّے دوست رہنا ہو۔
Tashree -
چاند سُورج اور ستاروں کے بسیرے ہو پِتا، زرہ بکتر سے محافظ عارفوں کے ہمنوا۔
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