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सामवेद के मन्त्र
सामवेद - मन्त्रसंख्या 1442
ऋषिः - भरद्वाजो बार्हस्पत्यः
देवता - इन्द्रः
छन्दः - अनुष्टुप्
स्वरः - गान्धारः
काण्ड नाम -
2
य꣡दी꣢ सु꣣ते꣢भि꣣रि꣡न्दु꣢भिः꣣ सो꣡मे꣢भिः प्रति꣣भू꣡ष꣢थ । वे꣢दा꣣ वि꣡श्व꣢स्य꣣ मे꣡धि꣢रो धृ꣣ष꣢꣫त्तन्त꣣मि꣡देष꣢꣯ते ॥१४४२॥
स्वर सहित पद पाठय꣡दि꣢꣯ । सु꣣ते꣡भिः꣢ । इ꣡न्दु꣢꣯भिः । सो꣡मे꣢꣯भिः । प्र꣣तिभू꣡ष꣢थ । प्र꣣ति । भू꣡ष꣢꣯थ । वे꣡द꣢꣯ । वि꣡श्व꣢꣯स्य । मे꣡धि꣢꣯रः । घृ꣣ष꣢त् । त꣡न्त꣢꣯म् । तम् । त꣣म् । इ꣢त् । आ । इ꣣षते ॥१४४२॥
स्वर रहित मन्त्र
यदी सुतेभिरिन्दुभिः सोमेभिः प्रतिभूषथ । वेदा विश्वस्य मेधिरो धृषत्तन्तमिदेषते ॥१४४२॥
स्वर रहित पद पाठ
यदि । सुतेभिः । इन्दुभिः । सोमेभिः । प्रतिभूषथ । प्रति । भूषथ । वेद । विश्वस्य । मेधिरः । घृषत् । तन्तम् । तम् । तम् । इत् । आ । इषते ॥१४४२॥
सामवेद - मन्त्र संख्या : 1442
(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 6; अर्ध-प्रपाठक » 3; दशतिः » ; सूक्त » 2; मन्त्र » 3
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 13; खण्ड » 1; सूक्त » 2; मन्त्र » 3
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(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 6; अर्ध-प्रपाठक » 3; दशतिः » ; सूक्त » 2; मन्त्र » 3
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 13; खण्ड » 1; सूक्त » 2; मन्त्र » 3
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विषय - ब्रह्मचर्य
पदार्थ -
प्रभु 'भारद्वाज बार्हस्पत्य' = शक्ति को अपने में भरनेवाले ज्ञानी से कहते हैं कि (यत् ई) = जब ही तुम (सुतेभिः) = शरीर में रसादि क्रम से उत्पन्न हुए-हुए (इन्दुभिः) = शक्ति देनेवाले (सोमेभिः) = सोमकणों से (प्रतिभूषथ) = अपने अङ्ग-प्रत्यङ्ग को सुभूषित करते हो [भूष्=adorn, give beauty to] तो उसका परिणाम यह होता है कि तुम १. (विश्वस्य वेद) = ज्ञानी बनते हो - सारे ज्ञान-विज्ञान के प्राप्त करनेवाले होते हो। २. (मेधिरः) = उत्तम मेधावाले बनते हो । बुद्धि का निर्माण इन्हीं सोमकणों से होता है। सोम का अपव्यय करनेवालों की ज्ञानाग्नि बुझ जाती है - थोड़े-से भी गम्भीर चिन्तन से उनका सिर दर्द करने लगता है ३. (धृषत्) = तू काम, क्रोध, लोभ आदि अन्त:शत्रुओं का धर्षण करनेवाला बनता है। ये शत्रु तुझपर प्रबल नहीं हो पाते । ४. तं तं इत् एषते - यह सोम से अपने जीवन को सुन्दर बनानेवाला उस-उस कामना को प्राप्त होता है, अर्थात् जो चाहता है वह करने में समर्थ होता है, ब्रह्मचारी के लिए कुछ भी अप्राप्य नहीं है ।
भावार्थ -
ब्रह्मचर्य से सोमकणों की ऊर्ध्वगति के द्वारा १. मनुष्य सम्पूर्ण ज्ञान-विज्ञानों को प्राप्त करता है । २. बुद्धिमान् बनता है । ३. शत्रुओं का धर्षण करनेवाला होता है और ४. सब कामनाओं को प्राप्त करता है ।
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