Loading...

सामवेद के मन्त्र

  • सामवेद का मुख्य पृष्ठ
  • सामवेद - मन्त्रसंख्या 644
    ऋषिः - प्रजापतिः देवता - इन्द्रः छन्दः - विराडनुष्टुप् स्वरः - गान्धारः काण्ड नाम - 0
    21

    वि꣣दा꣢ रा꣣ये꣢ सु꣣वी꣢र्यं꣣ भ꣢वो꣣ वा꣡जा꣢नां꣣ प꣢ति꣣र्व꣢शा꣣ꣳ अ꣡नु꣢ । म꣡ꣳहिष्ठ वज्रिन्नृ꣣ञ्ज꣢से꣣ यः꣡ शवि꣢꣯ष्ठः꣣ शू꣡रा꣢णाम् ॥६४४

    स्वर सहित पद पाठ

    वि꣣दाः꣢ । रा꣣ये꣢ । सु꣣वी꣡र्य꣣म् । सु꣣ । वी꣡र्य꣢꣯म् । भु꣡वः꣢꣯ । वा꣡जा꣢꣯नाम् । प꣡तिः꣢꣯ । व꣡शा꣢꣯न् । अ꣡नु꣢꣯ । मँ꣡हि꣢꣯ष्ठ । व꣣ज्रिन् । ऋञ्ज꣡से꣢ । यः । श꣡वि꣢꣯ष्ठः । शू꣡रा꣢꣯णाम् ॥६४४॥


    स्वर रहित मन्त्र

    विदा राये सुवीर्यं भवो वाजानां पतिर्वशाꣳ अनु । मꣳहिष्ठ वज्रिन्नृञ्जसे यः शविष्ठः शूराणाम् ॥६४४


    स्वर रहित पद पाठ

    विदाः । राये । सुवीर्यम् । सु । वीर्यम् । भुवः । वाजानाम् । पतिः । वशान् । अनु । मँहिष्ठ । वज्रिन् । ऋञ्जसे । यः । शविष्ठः । शूराणाम् ॥६४४॥

    सामवेद - मन्त्र संख्या : 644
    (कौथुम) महानाम्न्यार्चिकः » प्रपाठक » ; अर्ध-प्रपाठक » ; दशतिः » ; मन्त्र » 4
    (राणानीय) महानाम्न्यार्चिकः » अध्याय » ; खण्ड » ;
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    अगले मन्त्र में पुनः परमात्मा से प्रार्थना की गयी है।

    पदार्थ

    हे जगदीश्वर ! आप (राये) विद्या, आरोग्य, धन, स्वराज्य, चक्रवर्ती राज्य आदि ऐश्वर्य के लिए तथा मोक्ष-रूप ऐश्वर्य के लिए हमें (सुवीर्यम्) उत्कृष्ट शारीरिक तथा आत्मिक बल (विदाः) प्राप्त कराइए। आप (वाजानाम्) बलों के (पतिः) अधीश्वर (भवः) हैं। (वशान्) आपकी कामना करनेवाले, आपकी प्रीति के अधीन हमें (अनु) अनुगृहीत कीजिए। हे (मंहिष्ठ) सबसे बड़े दानी, हे (वज्रिन्) ओजस्वी परमेश्वर ! आप (ऋञ्जसे) हमें ओज आदि गुणों से अलङ्कृत कीजिए, (यः) जो आप (शूराणाम्) शूरवीरों में (शविष्ठः) सबसे अधिक बली हैं ॥४॥

    भावार्थ

    जो शरीर और आत्मा से बलवान् है, वही ऐश्वर्य प्राप्त करता है। अतः बलिष्ठ परमेश्वर के समान हम भी बलवान् बनें ॥४॥

    इस भाष्य को एडिट करें

    पदार्थ

    (राये सुवीर्य विदाः) मोक्षैश्वर्य के लिये संयत वीर्य प्राप्त करा (वाजानां पतिः) बलों के स्वामिन् (वशान्-अनुभुवः) अपने वशों में उन्हें अनुभावित कर (मंहिष्ठ वाजिन्-ऋञ्जसे) हे प्रशंसनीय बलवन्! तू हमें समर्थ कर (यः) जो तू (शूराणां शविष्ठ) शूरवीरों में—प्रख्यातों में अत्यन्त बलवान् है।

    भावार्थ

    परमात्मा मोक्षैश्वर्य प्राप्त करने के संयम वाला वीर्य देता है। वह समस्त बलों का स्वामी है, उन्हें अपने वश किए हुए है। वह प्रशंसनीय महान् है, हमें समर्थ बनाता है। वह शूरवीरों में प्रख्यात महान् है। उसकी शरण लेनी, उसकी उपासना करनी चाहिए॥४॥

    विशेष

    <br>

    इस भाष्य को एडिट करें

    विषय

    वीर्यवान् ही दाता बनता है

    पदार्थ

    (राये) = उस ऐश्वर्य के लिए जिसे हम उदार मनोवृत्ति से लोकहित के लिए दे डालते हैं [रा–दाने] (सुवीर्यम्) = उत्तम शक्ति को (विदा) = प्राप्त कर । प्रभु के इस वाक्य को सुनकर जीव प्रश्न करता है इस शक्ति को प्राप्त कैसे करूँ? प्रभु उत्तर देते हैं कि तू (वशान् अनु) = संयमी–जितेन्द्रिय -वशी लोगों के पीछे चलता हुआ (वाजानां पतिः भवः) = शक्तियों का पति बन। जितेन्द्रियता ही शक्तिसम्पन्न बनने का एकमात्र मार्ग है। यह शक्तिसम्पन्न पुरुष अपने शरीर को वज्रतुल्य बनाकर 'मंहिष्ठ' कहलाया है। यह (वज्रिन् मंहिष्ठ ऋञ्जसे) = प्रभु की सच्ची आराधना करता है (यः) = जो (शूराणाम् शविष्ठः) = शूरों में भी शूरतम है। वस्तुतः बिना शूरता के दानशूरता भी हममें आती नहीं। निर्बल व्यक्ति कृपण मनोवृत्ति का बन जाता है। वह धन का त्याग करके प्रभु का आराधक बने यह उसके वश की बात नहीं रहती। 

    भावार्थ

    हम जितेन्द्रिय बन शक्ति का सम्पादन करें।

    इस भाष्य को एडिट करें

    विषय

    "Missing"

    भावार्थ

    भा० = हे त्रैलोक्यपते ! आप हमें ( राये ) = श्रेष्ठ धन, आत्मज्ञान के करने के लिये प्रथम ( सुवीर्यं ) = उत्तम वीर्य, सामर्थ्य, ब्रह्मचर्य को ( विदाः ) = प्राप्त कराओ । ( यः ) = जो ( शूराणाम् ) = शूरवीरों में भी ( शविष्ठः ) = सब से अधिक बलवान् है, हे ( मंहिष्ठ ) = सबसे महान् ! ( वज्रिन् ) = बलवन् ! पापनाशक ! आप ( वाजानां पतिः ) = समस्त ऐश्वर्यो ज्ञानों  और बलों के पति ( भवः ) = हैं। और ( वशान् ) = आपके वशीभूत समस्त लोकों के ( अनु ) = अनुकूल हितके लिये उनपर ( ॠञ्जसे ) = वश करते हो ।

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    ऋषिः - प्रजापतिः।

    देवता - इन्द्रस्त्रैलोक्यात्मा ।

    इस भाष्य को एडिट करें

    संस्कृत (1)

    विषयः

    अथ पुनः परमात्मानं प्रार्थयते।

    पदार्थः

    हे जगदीश्वर ! त्वम् (राये) विद्यारोग्यधनस्वराज्यचक्रवर्ति- राज्यादिकाय ऐश्वर्याय मोक्षैश्वर्याय च, अस्मान् (सुवीर्यम्) उत्कृष्टं शारीरम् आत्मिकं च बलम् (विदाः) वेदय, लम्भय। त्वम् (वाजानाम्) बलानाम् (पतिः) अधीश्वरः (भवः) अभवः, भूतोऽसि। (वशान्) त्वां कामयमानान् त्वत्प्रीतिपरवशान् अस्मान् (अनु) अनुगृहाण। हे (मंहिष्ठ) दातृतम, हे (वज्रिन्) ओजस्विन् ! त्वम् (ऋञ्जसे) अस्मान् ओजःप्रभृतिभिः गुणैः प्रसाधय, (यः) यस्त्वम् (शूराणाम्) वीराणाम् (शविष्ठः) बलवत्तमः, असि। (विदाः) विद्लृ लाभे, ण्यर्थगर्भः, लेटि रूपम्, (भवः) भवतेर्लङि रूपम्, अडागमाभावश्छान्दसः। (वशान्), वश कान्तौ ॥४॥

    भावार्थः

    यः शरीरेणात्मना च बलवान् स एवैश्वर्याणि लभते। अतो बलिष्ठपरमेश्वरवद् वयमपि बलवन्तो भवेम ॥४॥

    इस भाष्य को एडिट करें

    इंग्लिश (2)

    Meaning

    O God, grant us celibacy for acquiring spiritual knowledge. Thou art most Heroic amongst the heroes. O Mightiest, O Sin-Destroyer Thou art the Lord of all sciences and forces. Thou Controllest Thy subjects for their betterment !

    इस भाष्य को एडिट करें

    Meaning

    Indra, who are omniscient, most generous of the mighty glorious, refulgent as the sun, lead us on to strength and victory. O lord, exalt the man who strives. O man, adore and exalt the lord who leads.

    इस भाष्य को एडिट करें

    गुजराती (1)

    पदार्थ

    પદાર્થ : (राये सुवीर्य विदाः) મોક્ષ ઐશ્વર્યને માટે સંયત વીર્ય પ્રાપ્ત કરાવ. (वाजानां पतिः) બળોના સ્વામિન્ ! (वशान् अनुभुवः) પોતાના વશમાં તેને અનુભાવિત કર (मंहिष्ठ वाजिन् ऋञ्जसे) હે પ્રશંસનીય બળવાન્ ! તું અમને સમર્થ કર. (यः) જે તું (शूराणां शविष्ठ) શૂરવીરોમાં સર્વથી અત્યંત બળવાન છે. (૪)
     

    भावार्थ

    ભાવાર્થ : પરમાત્મા મોક્ષેશ્વર્ય પ્રાપ્ત કરવા માટે સંયમવાળું વીર્ય આપે છે. તે સમસ્ત બળોનો સ્વામી છે, તેને પોતાને વશ કરે છે. તે પ્રશંસનીય મહાન છે, અમને સમર્થ બનાવે છે. તે શૂરવીરમાં સર્વથી મહાન છે. તેનું શરણ લેવું, તેની ઉપાસના કરવી જોઈએ. (૪)
     

    इस भाष्य को एडिट करें

    उर्दू (1)

    Mazmoon

    روحانی دولتوں کیلئے ہمیں طاقتور کیجئے!

    Lafzi Maana

    روحانی دھنوں کے حصول کے لئے ہمیں بل وِیریہ عطا کریں۔ آپ ہی تمام طاقتوں کے منبع ہیں اور ہم آپ کے دیرینہ عبادت گزار ہیں، لہذا اپنی نُورانی زیارت فرمائین۔ بُرائیوں کو خاکستر کرنے والے بجر دھاری ایشور! ہم پر اپنی رہمت برسائیں، کیونکہ آپ ہی تو دُنیا میں واحد عظیم طاقت ہیں!

    Tashree

    سرچشمیہ طاقتوں کے ہو طاقت وہ دیجئے ہمیں، جس سے کہ آتم بل کو پا درشن تمہارا کر سکیں۔

    इस भाष्य को एडिट करें

    मराठी (2)

    भावार्थ

    जो शरीर व आत्म्याने बलवान आहे, तोच ऐश्वर्य प्राप्त करतो. त्यासाठी बलिष्ठ परमेश्वराप्रमाणे आम्हीही बलवान बनावे ॥४॥

    इस भाष्य को एडिट करें

    विषय

    पुन्हा परमेश्वाला प्रार्थना

    शब्दार्थ

    हे जगदीश्वर, (राये) विद्या, आरोग्य, धन, स्वराज्य, चक्रवर्ती राज्य आदी ऐश्वर्याच्या प्राप्तीकरिता अथवा मोक्षरूप ऐश्वर्य प्राप्तीसाठी आम्हाला (सुवीर्यम्) उत्तम शारीरिक व आत्मिक बळ (विदा.) द्या. तुम्ही (वाजानाम्) शक्तीचे (पतिः) अधीश्वर (भवः) आहात (वशान्) तुमची कामना करणाऱ्या व तुमच्या प्रेमाच्या वश असलेल्या आम्हाला (अनु) अनुगृहीत करा. हे (मंहिष्ठ) सर्वोत्कृष्ट दानी, हे (वज्रिन) ओजस्वी परमेश्वर, आपण (ऋग्जुसे) आम्हाला ओज आदी गुणांनी अलंकृत करा. (यः) असे ते आपण (शूराणाम्) शूरवीर जनांपैकी (शविष्ठः) सर्वाधिक बली आहात.।।४।।

    भावार्थ

    जो शरीराने व आत्म्याने शक्तिवान आहे, तोच ऐश्वर्य प्राप्त करू इच्छितो. म्हणून बलिष्ठ परमेश्वराप्रमाणे आम्हीही बलवान व्हावे.।। ४।।

    इस भाष्य को एडिट करें

    तमिल (1)

    Word Meaning

    ஐசுவரியத்திற்கு சுபமான வீரத்தை அளிக்கவும்.
    அடையச் செய்யவும், சூரர்களிலும் அதிக சக்தி வாய்ந்தவனான மகா புருஷனே, வச்சிராயுதனே ! நீ எல்லா ஐசுவரியங்களின் பதியாகும் ; சனங்களை (அவர்களின்) ஹிதத்திற்காக சாமர்த்திய முடனாக்கவும்.

    इस भाष्य को एडिट करें
    Top