अथर्ववेद के काण्ड - 15 के सूक्त 8 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 15/ सूक्त 8/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - अध्यात्म अथवा व्रात्य देवता - साम्नी उष्णिक् छन्दः - अथर्वा सूक्तम् - अध्यात्म प्रकरण सूक्त
    पदार्थ -

    (सः) उस [व्रात्यपरमात्मा] ने (अरज्यत) प्रेम किया, (ततः) उसी से वह (राजन्यः) सर्वस्वामी (अजायत) हुआ ॥१॥

    भावार्थ -

    परमात्मा अपनीस्वाभाविक प्रीति से सब सृष्टि का स्वामी है ॥१॥

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