अथर्ववेद के काण्ड - 16 के सूक्त 8 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 16/ सूक्त 8/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - दुःस्वप्ननासन देवता - यजुर्ब्राह्मी एकपदा अनुष्टुप् छन्दः - यम सूक्तम् - दुःख मोचन सूक्त
    पदार्थ -

    (जितम्) जय किया हुआवस्तु (अस्माकम्) हमारा, (उद्भिन्नम्) निकासी किया हुआ धन (अस्माकम्) हमारा, (ऋतम्) वेदज्ञान (अस्माकम्) हमारा, (तेजः) तेज (अस्माकम्) हमारा, (ब्रह्म) अन्न (अस्माकम्) हमारा, (स्वः) सुख (अस्माकम्) हमारा, (यज्ञः) यज्ञ [देवपूजा, संगतिकरण और दान] (अस्माकम्) हमारा, (पशवः) सब पशु [गौ घोड़ा आदि] (अस्माकम्)हमारे, (प्रजाः) प्रजागण, (अस्माकम्) हमारे और (वीराः) वीर लोग (अस्माकम्) हमारे [होवें] ॥१॥

    भावार्थ -

    विद्वान् धर्मवीर राजासुवर्ण आदि धन और सब सम्पत्ति का सुन्दर प्रयोग करे और अपने प्रजागण और वीरों कोसदा प्रसन्न रख कर कुमार्गियों को कष्ट देकर नाश करे ॥१-४॥

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