Loading...
अथर्ववेद के काण्ड - 16 के सूक्त 9 के मन्त्र

मन्त्र चुनें

  • अथर्ववेद का मुख्य पृष्ठ
  • अथर्ववेद - काण्ड 16/ सूक्त 9/ मन्त्र 2
    ऋषि: - सोम, पूषा देवता - आर्ची उष्णिक् छन्दः - यम सूक्तम् - दुःख मोचन सूक्त
    2

    तद॒ग्निरा॑ह॒तदु॒ सोम॑ आह पू॒षा मा॑ धात्सुकृ॒तस्य॑ लो॒के ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    तत् । अ॒ग्नि: । आ॒ह॒ । तत् । ऊं॒ इति॑ । सोम॑: । आ॒ह॒ । पू॒षा । मा॒ । धा॒त् । सु॒ऽकृ॒तस्य॑ । लो॒के ॥९.२॥


    स्वर रहित मन्त्र

    तदग्निराहतदु सोम आह पूषा मा धात्सुकृतस्य लोके ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    तत् । अग्नि: । आह । तत् । ऊं इति । सोम: । आह । पूषा । मा । धात् । सुऽकृतस्य । लोके ॥९.२॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 16; सूक्त » 9; मन्त्र » 2
    Acknowledgment

    पदार्थ -
    (तत्) यह (अग्निः)ज्ञानस्वरूप परमेश्वर (आह) कहता है, (तत् उ) यही (सोमः) सर्वोत्पादक परमात्मा (आह) कहता है, (पूषा) पोषण करनेवाला जगदीश्वर (मा) मुझे (सुकृतस्य) पुण्य कर्मके (लोके) लोक [समाज] में (धात्) रक्खे ॥२॥

    भावार्थ - परमात्मा निरन्तरआज्ञा देता है कि मनुष्य सदा धर्मात्माओं के समाज में रह कर उन्नति करे ॥२॥इसमन्त्र का कुछ भाग आ चुका है-अ० ८।५।५ ॥


    Bhashya Acknowledgment

    Meaning -
    This is what Agni, lord of light and fire of life, said, this is what Soma, lord of peace and universal happiness, said for me: “May Pusha, lord of life and nourishment, bless you”. I pray: May Pusha establish me in the world of noble action and blessed joy.


    Bhashya Acknowledgment
    Top