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अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 128 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 128/ मन्त्र 2
    ऋषिः - अथर्वाङ्गिरा देवता - सोमः, शकधूमः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - राजा सूक्त
    55

    भ॑द्रा॒हं नो॑ म॒ध्यन्दि॑ने भद्रा॒हं सा॒यम॑स्तु नः। भ॑द्रा॒हं नो॒ अह्नां॑ प्रा॒ता रात्री॑ भद्रा॒हम॑स्तु नः ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    भ॒द्र॒ऽअ॒हम् । न॒: । म॒ध्यंदि॑ने । भ॒द्र॒ऽअ॒हम् । सा॒यम् । अ॒स्तु॒ । न॒: । भ॒द्र॒ऽअ॒हम् । न॒: । अह्ना॑म् । प्रा॒त: । रात्री॑ भ॒द्र॒ऽअ॒हम् । अ॒स्तु॒ । न॒: ॥१२८.२॥


    स्वर रहित मन्त्र

    भद्राहं नो मध्यन्दिने भद्राहं सायमस्तु नः। भद्राहं नो अह्नां प्राता रात्री भद्राहमस्तु नः ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    भद्रऽअहम् । न: । मध्यंदिने । भद्रऽअहम् । सायम् । अस्तु । न: । भद्रऽअहम् । न: । अह्नाम् । प्रात: । रात्री भद्रऽअहम् । अस्तु । न: ॥१२८.२॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 6; सूक्त » 128; मन्त्र » 2
    Acknowledgment

    हिन्दी (5)

    विषय

    आनन्द पाने का उपदेश।

    पदार्थ

    (नः) हमारे लिये (मध्यन्दिने) मध्य दिन में (भद्राहम्) शुभ दिन, (नः) हमारे लिये (सायम्) सायंकाल में (भद्राहम्) शुभ दिन, (नः) हमारे लिये (अह्नाम्) सब दिनों के (प्रातः) प्रातःकाल में (भद्राहम्) शुभ दिन (अस्तु) होवे, (नः) हमारे लिये (रात्री) रात्रि में (भद्राहम्) शुभ दिन (अस्तु) होवे ॥२॥

    भावार्थ

    मनुष्य परमेश्वर के अनुग्रह से सब काल में धर्म का आचरण करके सदा आनन्द भोगे ॥२॥

    टिप्पणी

    २−(भद्राहम्) म० १। शुभकालः (नः) अस्मभ्यम् (मध्यन्दिने) मध्याह्ने (सायम्) सूर्यास्ते (अस्तु) (अह्नाम्) सर्वदिनानाम् (प्रातः) सूर्योदये (रात्री) रात्र्याम् ॥अन्यद् व्याख्यातम्॥

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    विषय

    भद्राहम्

    पदार्थ

    १. (मध्यन्दिने) = मध्याह्न के समय (न:) = हमारा (भद्राहम्) = शोभन दिन हो। इसीप्रकार (न:) = हमारा (सायम्) = सूर्यास्त के समय भी (भद्राहम् अस्तु) = पुण्य-दिन हो। (अह्रां प्रात:) = पूर्वाह्नकाल में भी (न:) = हमारा (भद्राहम्) = पुण्य-दिन हो और इसीप्रकार (रात्री) = सारी रात (न:) = हमारे लिए (भद्राहम् अस्तु) = शुभ काल ही प्रमाणित हो।

    भावार्थ

    राष्ट्र-व्यवस्था के उत्तम होने पर दिन-रात हमारा कल्याण-ही-कल्याण हो।

     

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    पदार्थ

    शब्दार्थ = ( नः ) = हमारे लिए  ( मध्यं दिने ) = मध्याह्न काल में  ( भद्राहम् ) = शोभन  दिन अर्थात् सुखद दिन हो तथा  ( नः  ) = हमारे लिए  ( सायम् ) = सूर्य के अस्तकाल में भी  ( भद्राहम् अस्तु ) = पवित्र दिन हो तथा  ( अह्नाम् प्रात: ) = दिनों के प्रातः काल में भी  ( नः ) = हमारे लिए  ( भद्राहम् )  = पवित्र दिन हो तथा  ( रात्री ) = सब रात्रि  ( नः ) = हमारे लिए ( भद्राहम् )  = शुभ समयवाली हों । 

    भावार्थ

    भावार्थ = हे दयामय परमात्मन् ! आपकी कृपा से हमारे लिए प्रातःकाल, मध्याह्नकाल, सायंकाल और रात्रिकाल शुभ हों, अर्थात् सब काल में हम सुखी हों और आपको सदा स्मरण करते तथा आपकी वैदिक आज्ञा का पालन करते हुए पवित्रात्मा बनें, कभी आपको भूलकर आपकी आज्ञा के विरुद्ध चलनेवाले न बनें और अपने समय को व्यर्थ न खोएँ। ऐसी हमारी प्रार्थना को आप कृपा कर स्वीकार करें ।

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    भाषार्थ

    (भद्राहम्) सुखदायक और कल्याणकारी दिन हो (नः) हमारे लिये (मध्यन्दिने) मध्याह्न में (भद्राहम्) भद्रदिन (अस्तु) हो (नः) हमारे लिये (सायम्) सायंकाल में। (भद्राहम्) भद्रदिन हो (नः) हमारे लिये (अह्नाम् प्रातः) दिनों के प्रातःकाल में (भद्राहम्) भद्रदिन हो (नः) हमारे लिये (रात्री) रात्री काल में।

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    विषय

    राजा का राज्यारोहण।

    भावार्थ

    (नः) हमारा (मध्यन्दिने) मध्याह्नकाल में (भद्राहं अस्तु) सुखकर दिन हों। (नः सायं भद्राहम् अस्तु) हमारा दिन सायंकाल के अवसर में भी सुखकारी हो, (नः अह्नां प्रातः भद्राहम्) हमारे दिनों के प्रातःकाल का भाग कल्याणकारी हो, (नः रात्री भद्राहम् अस्तु) रात्रिकाल में भी शुभ कल्याणकारी दिन हो।

    टिप्पणी

    missing

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    अथर्वाङ्गिरा ऋषिः। नक्षत्राणि राजा चन्द्रः सोमः शकधूमश्च देवताः। १-३ अनुष्टुभः। चतुर्ऋचं सूक्तम्॥

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Ruler’s Election

    Meaning

    Let the day be auspicious for us at mid-day, let the day be auspicious in the evening, let the day be auspicious for us in the morning, and let the night too of every day be auspicious for us.

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    Translation

    May it be a good day for us at at noon (madhyandine); may it be a good day for us in the evening; may it be a good day for us in the morning of the days; and may it be a good day for us at nights .

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    Translation

    May there be fair and favorable Weather for us at the noon, let there be fair and favorable weather for us in the evening, may there be fair and favorable weather for us in the morning, let there be fair and favorable weather for us, in the day and let our night be of fair and favorable weather.

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    Translation

    May we have weather fair at noon, May we have weather fair at eve. May we have fair weather when the morning breaks. May we have fair weather when the night is come.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    २−(भद्राहम्) म० १। शुभकालः (नः) अस्मभ्यम् (मध्यन्दिने) मध्याह्ने (सायम्) सूर्यास्ते (अस्तु) (अह्नाम्) सर्वदिनानाम् (प्रातः) सूर्योदये (रात्री) रात्र्याम् ॥अन्यद् व्याख्यातम्॥

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    बंगाली (1)

    পদার্থ

    ভদ্রাহং নো মধ্যন্দিনে ভদ্রাহং সায়মস্তু নঃ।

    ভদ্রাহং নো অহ্নাং প্রাতা রাত্রী ভদ্রাহমস্তু নঃ।।২০।।

    (অথর্ব ৬।১২৮।২)

    পদার্থঃ (নঃ) আমাদের জন্য (মধ্যং দিনে) মধ্যাহ্ন কাল (ভদ্রাহম্) সুখদায়ক হোক তথা (নঃ) আমাদের জন্য (সায়ম্) সূর্যের অস্তকালও (ভদ্রাহম্ অস্তু) সুখদায়ক হোক। (অহ্নাম্ প্রাতঃ) দিবসের প্রাতঃকালও (নঃ) আমাদের জন্য (ভদ্রাহম্) সুখদায়ক হোক তথা (রাত্রী) সকল রাত্রি ( নঃ) আমাদের জন্য (ভদ্রাহম্ অস্তু) শুভ সময়যুক্ত হোক।

     

    ভাবার্থ

    ভাবার্থঃ হে দয়াময় পরমাত্মা! তোমার কৃপায় আমাদের জন্য প্রাতঃকাল, মধ্যাহ্নকাল, সায়ংকাল আর রাত্রিকাল শুভ হোক, অর্থাৎ সব কালে যেন আমরা সুখী হই আর তোমাকে সদা স্মরণ করি তথা তোমার বৈদিক আজ্ঞা পালন করে পবিত্রাত্মা হই। কখনো তোমাকে ভুলে তোমার আজ্ঞার বিরুদ্ধগামী যেন না হই আর নিজের সময়কে ব্যর্থতায় খুইয়ে না ফেলি।  আমাদের এই প্রার্থনাকে তুমি কৃপা করে স্বীকার করো, হে ভগবান! ।।২০।।

     

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