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अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 59 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 59/ मन्त्र 1
    ऋषि: - अथर्वा देवता - रुद्रः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - ओषधि सूक्त
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    अ॑न॒डुद्भ्य॒स्त्वं प्र॑थ॒मं धे॒नुभ्य॒स्त्वम॑रुन्धति। अधे॑नवे॒ वय॑से॒ शर्म॑ यच्छ॒ चतु॑ष्पदे ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    अ॒न॒डुत्ऽभ्य॑: । त्वम् । प्र॒थ॒मम् । धे॒नुऽभ्य॑:। त्वम् । अ॒रु॒न्ध॒ति॒ ।अधे॑नवे । वय॑से । शर्म॑ । य॒च्छ॒ । चतु॑:ऽपदे ॥५९.१॥


    स्वर रहित मन्त्र

    अनडुद्भ्यस्त्वं प्रथमं धेनुभ्यस्त्वमरुन्धति। अधेनवे वयसे शर्म यच्छ चतुष्पदे ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    अनडुत्ऽभ्य: । त्वम् । प्रथमम् । धेनुऽभ्य:। त्वम् । अरुन्धति ।अधेनवे । वयसे । शर्म । यच्छ । चतु:ऽपदे ॥५९.१॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 6; सूक्त » 59; मन्त्र » 1
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    पदार्थ -
    (अरुन्धति) हे रोक न डालनेवाली शक्ति ! परमात्मन् (त्वम्) तू (अनडुद्भ्यः) प्राण और जीविका पहुँचानेवाले पुरुषों को (त्वम्) तू (धेनुभ्यः) तृप्त करनेवाली स्त्रियों को और (अधेनवे) बिना दूधवाले (चतुष्पदे) चौपाये को (वयसे) अन्नप्राप्ति के लिये (प्रथमम्) विस्तृत (शर्म) घर (यच्छ) दे ॥१॥

    भावार्थ - सब स्त्री-पुरुष परमेश्वर की उपासना करके प्रयत्नपूर्वक अन्न आदि पदार्थ प्राप्त करके उत्तम-२ घर बनावें ॥१॥


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    Meaning -
    O Arundhati, give peace and comfort of good health first to the cow and the bullock, and give health and peace for life to all the quadrupeds other than the cow.


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