अथर्ववेद के काण्ड - 7 के सूक्त 52 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 7/ सूक्त 52/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - अथर्वा देवता - सांमनस्यम्, अश्विनौ छन्दः - ककुम्मत्यनुष्टुप् सूक्तम् - सांमनस्य सूक्त
    पदार्थ -

    (स्वेभिः) अपनों के साथ (नः) हमारा (संज्ञानम्) एक मत और (अरणेभिः) बाहिरवालों के साथ (संज्ञानम्) एकमत हो। (अश्विना) हे माता-पिता ! (युवम्) तुम दोनों (इह) यहाँ पर (अस्मासु) हम लोगों में (संज्ञानम्) एक मत (नि) निरन्तर (यच्छतम्) दान करो ॥१॥

    भावार्थ -

    मनुष्य माता-पिता आदिकों से शिक्षा पाकर वेद द्वारा संसार में एकता फैलावें ॥१॥

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