Sidebar
सामवेद के मन्त्र
सामवेद - मन्त्रसंख्या 1038
ऋषिः - मेधातिथिः काण्वः
देवता - पवमानः सोमः
छन्दः - गायत्री
स्वरः - षड्जः
काण्ड नाम -
3
आ꣡ व꣢च्यस्व꣣ म꣢हि꣣ प्स꣢रो꣣ वृ꣡षे꣢न्दो द्यु꣣म्न꣡व꣢त्तमः । आ꣡ योनिं꣢꣯ धर्ण꣣सिः꣡ स꣢दः ॥१०३८॥
स्वर सहित पद पाठआ । व꣣च्यस्व । म꣡हि꣢꣯ । प्स꣡रः꣢꣯ । वृ꣡षा꣢꣯ । इ꣣न्दो । द्युम्न꣡व꣢त्तमः । आ । यो꣡नि꣢꣯म् । ध꣣र्णसिः꣢ । स꣣दः ॥१०३८॥
स्वर रहित मन्त्र
आ वच्यस्व महि प्सरो वृषेन्दो द्युम्नवत्तमः । आ योनिं धर्णसिः सदः ॥१०३८॥
स्वर रहित पद पाठ
आ । वच्यस्व । महि । प्सरः । वृषा । इन्दो । द्युम्नवत्तमः । आ । योनिम् । धर्णसिः । सदः ॥१०३८॥
सामवेद - मन्त्र संख्या : 1038
(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 4; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » ; सूक्त » 3; मन्त्र » 2
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 7; खण्ड » 1; सूक्त » 3; मन्त्र » 2
Acknowledgment
(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 4; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » ; सूक्त » 3; मन्त्र » 2
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 7; खण्ड » 1; सूक्त » 3; मन्त्र » 2
Acknowledgment
Meaning -
Blissful Spirit of divinity, give us food for the mind and soul, great you are, delightful, generous, most sublime, the origin, wielder and sustainer of the universe and the truth of universal knowledge. (Rg. 9-2-2)