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सामवेद के मन्त्र
सामवेद - मन्त्रसंख्या 1189
ऋषिः - असितः काश्यपो देवलो वा
देवता - पवमानः सोमः
छन्दः - गायत्री
स्वरः - षड्जः
काण्ड नाम -
1
प꣡व꣢न्ते꣣ वा꣡ज꣢सातये꣣ सो꣡माः꣢ स꣣ह꣡स्र꣢पाजसः । गृ꣣णाना꣢ दे꣣व꣡वी꣢तये ॥११८९॥
स्वर सहित पद पाठप꣡वन्ते꣢꣯ । वा꣡ज꣢꣯सातये । वा꣡ज꣢꣯ । सा꣣तये । सो꣡माः꣢꣯ । स꣢ह꣡स्र꣢पाजसः । स꣣ह꣡स्र꣢ । पा꣣जसः । गृणानाः꣢ । दे꣣व꣡वी꣢तये । दे꣣व꣢ । वी꣣तये ॥११८९॥
स्वर रहित मन्त्र
पवन्ते वाजसातये सोमाः सहस्रपाजसः । गृणाना देववीतये ॥११८९॥
स्वर रहित पद पाठ
पवन्ते । वाजसातये । वाज । सातये । सोमाः । सहस्रपाजसः । सहस्र । पाजसः । गृणानाः । देववीतये । देव । वीतये ॥११८९॥
सामवेद - मन्त्र संख्या : 1189
(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 5; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » ; सूक्त » 3; मन्त्र » 3
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 9; खण्ड » 2; सूक्त » 1; मन्त्र » 3
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(कौथुम) उत्तरार्चिकः » प्रपाठक » 5; अर्ध-प्रपाठक » 1; दशतिः » ; सूक्त » 3; मन्त्र » 3
(राणानीय) उत्तरार्चिकः » अध्याय » 9; खण्ड » 2; सूक्त » 1; मन्त्र » 3
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विषय - शक्ति-धन व दिव्य गुण
पदार्थ -
१. (सोमाः) = जो व्यक्ति सोमपान के द्वारा शक्तिशाली व सौम्य हैं, २. (सहस्रपाजस:) = हज़ारों के पालक बलवाले हैं। [पाज: पालनात्, ‘पातेर्बलेजुट् च' उ० ४.२०८] जो व्यक्ति शक्ति प्राप्त करके हज़ारों व्यक्तियों का पालन करते हैं और ३. इस पालन के द्वारा सच्चे अर्थों में गृणाना: = प्रभु का स्तवन करते हैं – ये ही व्यक्ति १. (वाजसातये) = शक्ति व धन की प्राप्ति के लिए तथा २. (देववीतये) = दिव्य गुणों की प्राप्ति के लिए (पवन्ते) = गतिशील होते हैं ।
भावार्थ -
शक्ति, धन व दिव्य गुणों की प्राप्ति के लिए हमें सौम्य, सर्वभूतहिते रतः तथा स्तोता बनना चाहिए ।
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