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ऋग्वेद मण्डल - 7 के सूक्त 102 के मन्त्र
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  • ऋग्वेद - मण्डल 7/ सूक्त 102/ मन्त्र 2
    ऋषि: - वसिष्ठः कुमारो वाग्नेयः देवता - पर्जन्यः छन्दः - पादनिचृद्गायत्री स्वरः - षड्जः

    यो गर्भ॒मोष॑धीनां॒ गवां॑ कृ॒णोत्यर्व॑ताम् । प॒र्जन्य॑: पुरु॒षीणा॑म् ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    यः । गर्भ॑म् । ओष॑धीनाम् । गवा॑म् । कृ॒णोति॑ । अर्व॑ताम् । प॒र्जन्यः॑ । पु॒रु॒षीणा॑म् ॥


    स्वर रहित मन्त्र

    यो गर्भमोषधीनां गवां कृणोत्यर्वताम् । पर्जन्य: पुरुषीणाम् ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    यः । गर्भम् । ओषधीनाम् । गवाम् । कृणोति । अर्वताम् । पर्जन्यः । पुरुषीणाम् ॥ ७.१०२.२

    ऋग्वेद - मण्डल » 7; सूक्त » 102; मन्त्र » 2
    अष्टक » 5; अध्याय » 7; वर्ग » 2; मन्त्र » 2
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    पदार्थ -
    (यः) जो परमात्मा (ओषधीनाम्, गर्भम्) ओषधियों का उत्पत्तिस्थान है और (अर्वताम्, गवाम्, कृणोति) गमनशील विद्युदादि पदार्थों को रचता है तथा (पुरुषीणाम्, पर्जन्यः) जो मनुष्यों की बुद्धियों का तृप्तिजनक है ॥२॥

    भावार्थ - जिस सर्वतृप्तिकारक परमात्मा ने सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों को रच कर ओषधियों को उत्पन्न किया और जिसने मनुष्यों की बुद्धि की तृप्ति करने के लिये अपने अनन्त ज्ञान को मनुष्यों के लिये दिया, उसकी उपासना प्रत्येक मनुष्य को करनी चाहिये ॥२॥


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    पदार्थः -
    (यः) य ईश्वरः (ओषधीनाम्, गर्भम्) ओषधीनामुत्पत्तिस्थानमस्ति तथा च (अर्वताम्, गवाम्, कृणोति) गमनशीलविद्युदादिपदार्थान् रचयति तथा (पुरुषीणाम्, पर्जन्यः) मनुष्यबुद्धीनां तर्प्ताऽस्ति ॥२॥


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    Meaning -
    Celebrate the Parjanya, cloud of the showers of life and existence, who generates the Golden Egg, Hiranyagarbha, the seed of moving stars and revolving planets, herbs and trees, cows and horses and the humans, and the cloud which then brings the showers of living waters and vests the seeds of life in earth for vegetation and all that moves and achieves and all the human race for the continuance of life in existence.


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    भावार्थ - ज्या तृप्तिकारक परमेश्वराने संपूर्ण ब्रह्मांड निर्माण करून औषधी उत्पन्न केलेली आहे व ज्याने माणसांच्या बुद्धीला तृप्त करण्यासाठी आपले अनंत ज्ञान माणसांना दिलेले आहे, त्याची उपासना प्रत्येक माणसाने केली पाहिजे. ॥२॥


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