अथर्ववेद के काण्ड - 20 के सूक्त 41 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 20/ सूक्त 41/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - गोतमः देवता - इन्द्रः छन्दः - गायत्री सूक्तम् - सूक्त-४१
    पदार्थ -

    (अप्रतिष्कुतः) बे-रोक गतिवाले (इन्द्रः) इन्द्र [बड़े ऐश्वर्यवाले सेनापति] ने (दधीचः) पोषण प्राप्त करानेवाले पुरुष की (अस्थभिः) गतियों से (नव नवतीः) नौ नब्बे [९*९०=८१० अर्थात् बहुत से] (वृत्राणि) रोकनेवाले शत्रुओं को (जघान) मारा है ॥१॥

    भावार्थ -

    प्रतापी राजा प्रजापोषक वीरों के समान अनेक उपाय करके शत्रुओं को मारे ॥१॥

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