अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 13 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 13/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - अथर्वा देवता - मृत्युः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - मृत्युञ्जय सूक्त
    पदार्थ -

    (देववधेभ्यः) ब्राह्मणों के शस्त्रों को (नमः) नमस्कार और (राजवधेभ्यः) क्षत्रियों के शस्त्रों को (नमः) नमस्कार है। (अथो) और भी (ये) जो (विश्यानाम्) वैश्यों के (वधाः) शस्त्र हैं (तेभ्यः) उनको, और (मृत्यो) हे मृत्यु ! (ते) तुझ को (नमः) नमस्कार (अस्तु) होवे ॥१॥

    भावार्थ -

    विद्याबली, पराक्रमबली और धनबली भी मृत्यु के वश हैं। इस से सब धर्माचरण करते रहें ॥१॥

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