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अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 15 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 15/ मन्त्र 3
    ऋषिः - उद्दालक देवता - वनस्पतिः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - शत्रुनिवारण सूक्त
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    यथा॒ सोम॒ ओष॑धीनामुत्त॒मो ह॒विषां॑ कृ॒तः। त॒लाशा॑ वृ॒क्षाना॑मिवा॒हं भू॑यासमुत्त॒मः ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    यथा॑ । सोम॑: । ओष॑धीनाम् । उ॒त्ऽत॒म: । ह॒विषा॑म् । कृ॒त: । त॒लाशा॑ । वृ॒क्षाणा॑म्ऽइव । अ॒हम् । भू॒या॒स॒म् । उ॒त्ऽत॒म: ॥१५.३॥


    स्वर रहित मन्त्र

    यथा सोम ओषधीनामुत्तमो हविषां कृतः। तलाशा वृक्षानामिवाहं भूयासमुत्तमः ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    यथा । सोम: । ओषधीनाम् । उत्ऽतम: । हविषाम् । कृत: । तलाशा । वृक्षाणाम्ऽइव । अहम् । भूयासम् । उत्ऽतम: ॥१५.३॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 6; सूक्त » 15; मन्त्र » 3
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    उत्तम गुणों की प्राप्ति का उपदेश।

    पदार्थ

    (यथा) जैसे (सोमः) अमृत [अन्न वा सोम लता] (ओषधीनाम्) तापनाशक ओषधियों और (हविषाम्) ग्राह्य पदार्थों में (उत्तमः) उत्तम (कृतः) बनाया गया है। और (वृक्षाणाम् इव) जैसे उत्तम पदार्थों में (तलाशा) आश्रय प्राप्त करनेवाली लक्ष्मी है, [वैसे ही] (अहम्) मैं (उत्तम) उत्तम (भूयासम्) हो जाऊँ ॥३॥

    भावार्थ

    मनुष्य अन्न, सुवर्ण आदि पदार्थ प्राप्त करके उत्तम होवें ॥३॥

    टिप्पणी

    ३−(यथा) येन प्रकारेण (सोमः) अमृतमन्नं सोमलता वा (ओषधीनाम्) तापनाशकपदार्थानाम् (उत्तमः) श्रेष्ठः (हविषाम्) ग्राह्यवस्तूनाम् (कृतः) निर्मितः (तलाशा) तलमाधारम् अश्नुते। तल+अशू व्याप्तौ−अच्, टाप्। आधारव्यापयित्री लक्ष्मीः (वृक्षाणाम्) वरणीयानां मध्ये (अहम्) (भूयासम्) (उत्तमः) ॥

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    विषय

    सोमः, तलाश:

    पदार्थ

    १. (यथा) = जैसे (ओषधीनाम) = ओषधियों में (सोमः उत्तमः) = सोम उत्तम है और जैसे यह सोम (हविषाम्) = हव्य पदार्थों में (उत्तमः कृत:) = किया गया है, (इव) = जैसे (वृक्षाणां) = तलाशा वृक्षों में तलाश [पलाश-ढाक] वृक्ष उत्तम है [तलं अश्नुते], इसीप्रकार (अहम्) = मैं (उत्तम: भूयासम्) = अपने कुल में उत्तम बनें।

    भावार्थ

    मैं अपने कुल में ऐसे उत्तम बनूं जैसेकि ओषधियों में सोम और वृक्षों में पलाश।

    विशेष

    ओषधिरस का पान करनेवाला [ब्रह्मौषधि का उपासक] अपने जीवन को सुखी बनानेवाला 'शौनक' कहलाता है [शुनं सुखम्]। यही अगले सुक्त का ऋषि है। -

     

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    भाषार्थ

    (यथा) जैसे (ओषधीनाम् हविषाम् ) हविष्य ओषधियों में (सोमः ) सोम (उत्तमः) उत्तम ( कृत:) विधाता ने किया है, तथा (वृक्षाणाम् ) वृक्षों में (तलाशा) तलाश ओषधि उत्तम को गई है, (इव) इसी प्रकार (अहम्) मैं (उत्तमः भूयासम् ) [सबन्धुओं और असबन्धुओं में] उत्तम हो जाऊं ।

    टिप्पणी

    [तलाशा स्त्रीलिङ्ग एक वचन । सायण ने "तलाशा" का अर्थ "पलाश" वृक्ष किया है। "तलाशा" [स्त्रीलिङ्ग] ओषधि है (मन्त्र १)। तलाशा= तल (प्रतिष्ठायाम्, चुरादिः) + आ (व्याप्य) + शीङ् (स्वप्ने; अदादिः)+ड: (प्रत्यय औणादिकः)+टाप् [स्त्रियाम्] वृक्षों को निज आधाररूप करके और उन्हें व्याप्त करके, शयन करने वाली ओषधि। वृक्ष और ओषधियां हैं "ऊध्वस्वप्नाः" (अथर्व ६।४४।१) जो कि ऊर्ध्व दिशा की ओर बढ़ते हैं और स्वप्नावस्था में होते हैं, शयन करते हैं]।

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    विषय

    सर्वोत्तम होने की साधना।

    भावार्थ

    (यथा) जिस प्रकार (सोमः) सोमलता (हविषां) इन्द्रियों के पुष्टिकारक चरु द्वव्यों के निमित्त (ओषधीनां) ओषधियों में सब से (उत्तमः कृतः) उत्तम बतलाया गया है और (वृक्षाणाम्) वृक्षों में से (तलाशा) ‘तलाशा’ नामक वृक्ष सब से श्रेष्ठ है उसी प्रकार (अहम्) मैं सब देहधारी जीवों में (उत्तमः) उत्कृष्ट (भूयासम्) हो जाऊं। सायण के अनुसार 'पलाश:' पाठ है।

    टिप्पणी

    missing

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    उद्दालक ऋषिः। वनस्पतिर्देवता। अनुष्टुप्। तृचं सूक्तम्॥

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    To be the Best

    Meaning

    Just as soma is the best of herbs, the best of yajna havis too, so, I pray, I may be the best among contestants, like talasha, the best and highest among trees.

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    Translation

    Just as soma is made best among herbal oblations and talasa among trees, so may I become upper-most.

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    Translation

    As the Soma plant is treated to be best of all the herbaceous plants and oblations of Yajna so, as the Balasa, is excellent of the trees, may I be best of all.

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    Translation

    Just as Soma has been made the best of all oblations amid the medicinal plants, so, as wealth is the best of worldly supports may I be chief of all.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    ३−(यथा) येन प्रकारेण (सोमः) अमृतमन्नं सोमलता वा (ओषधीनाम्) तापनाशकपदार्थानाम् (उत्तमः) श्रेष्ठः (हविषाम्) ग्राह्यवस्तूनाम् (कृतः) निर्मितः (तलाशा) तलमाधारम् अश्नुते। तल+अशू व्याप्तौ−अच्, टाप्। आधारव्यापयित्री लक्ष्मीः (वृक्षाणाम्) वरणीयानां मध्ये (अहम्) (भूयासम्) (उत्तमः) ॥

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