अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 60 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 60/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - अथर्वा देवता - अर्यमा छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - पतिलाभ सूक्त
    पदार्थ -

    (अयम्) यह (विषितस्तुपः) प्रसिद्ध स्तुतिवाला (अर्यमा) अन्धकारनाशक सूर्य (अस्यै) इस (अग्रुवै) ज्ञानवती कन्या के लिये (पतिम्) पति, (उत) और (अजानये) अविवाहित पुरुष के लिये (जायाम्) पत्नी (इच्छन्) चाहता हुआ (पुरस्तात्) हमारे आगे (आ याति) आता है ॥१॥

    भावार्थ -

    ब्रह्मचारिणी और ब्रह्मचारी वेद आदि शास्त्रों के अध्ययन से सूर्य के समान तेजस्वी अर्थात् ब्रह्मवर्चसी होकर युवा अवस्था में गृहस्थाश्रम में प्रवेश करें ॥१॥

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