अथर्ववेद के काण्ड - 7 के सूक्त 69 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 7/ सूक्त 69/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - शन्तातिः देवता - सुख छन्दः - पथ्यापङ्क्तिः सूक्तम् - सुख सूक्त
    पदार्थ -

    (शम्) सुखकारी (वातः) वायु (नः) हमारे लिये (वातु) चले, (शम्) सुखकारी (सूर्यः) सूर्य (नः) हमारे लिये (शम्) (तपतु) तपे। (अहानि) दिन (नः) हमारे लिये (शम्) सुखकारी (भवन्तु) होवें, (रात्री) रात्रि (शम् प्रति) सुख के लिये (धीयताम्) धारण की जावे (शम्) सुखकारी (उषाः) उषा [प्रभात वेला] (नः) हमारे लिये (वि) विविध प्रकार (उच्छतु) चमके ॥१॥

    भावार्थ -

    मनुष्य ईश्वर और आप्त विद्वानों की शिक्षा से ऐसे काम करें, जिसमें वायु, सूर्य आदि पदार्थों से प्रतिक्षण सुख मिलता रहे ॥१॥

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