अथर्ववेद - काण्ड 20/ सूक्त 93/ मन्त्र 1
उत्त्वा॑ मन्दन्तु॒ स्तोमाः॑ कृणु॒ष्व राधो॑ अद्रिवः। अव॑ ब्रह्म॒द्विषो॑ जहि ॥
स्वर सहित पद पाठउत् । त्वा॒ । म॒न्द॒न्तु॒ । स्तोमा॑: । कृ॒णु॒ष्व । राध॑: । अ॒द्रि॒व॒: ॥ अव॑ । ब्र॒ह्म॒ऽद्विष॑: । ज॒हि॒ ॥९३.१॥
स्वर रहित मन्त्र
उत्त्वा मन्दन्तु स्तोमाः कृणुष्व राधो अद्रिवः। अव ब्रह्मद्विषो जहि ॥
स्वर रहित पद पाठउत् । त्वा । मन्दन्तु । स्तोमा: । कृणुष्व । राध: । अद्रिव: ॥ अव । ब्रह्मऽद्विष: । जहि ॥९३.१॥
अथर्ववेद - काण्ड » 20; सूक्त » 93; मन्त्र » 1
भाषार्थ -
(अद्रिवः) हे अविदीर्ण शक्तियोंवाले परमेश्वर! (स्तोमाः) हमारे स्तुतिगान (त्वा) आपको (उत् मन्दन्तु) प्रसन्न करें, और आप (राधः) आध्यात्मिक-धन (कृणुष्व) हमें प्रदान कीजिए, और (ब्रह्मद्विषः) आप-ब्रह्म सम्बन्धी विरोधी भावनाओं का (अव जहि) हनन कीजिए।