Loading...
अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 16 के मन्त्र

मन्त्र चुनें

  • अथर्ववेद का मुख्य पृष्ठ
  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 16/ मन्त्र 4
    ऋषि: - शौनक् देवता - चन्द्रमाः छन्दः - त्रिपदा प्रतिष्ठा गायत्री सूक्तम् - अक्षिरोगभेषज सूक्त
    14

    अ॑ल॒साला॑सि॒ पूर्वा॑ सि॒लाञ्जा॑ला॒स्युत्त॑रा। नी॑लागल॒साला॑ ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    अ॒ल॒साला॑ । अ॒सि॒ । पूर्वा॑ । सि॒लाञ्जा॑ला । अ॒सि॒ । उत्त॑रा । नी॒ला॒ग॒ल॒साला॑ ॥१६.४॥


    स्वर रहित मन्त्र

    अलसालासि पूर्वा सिलाञ्जालास्युत्तरा। नीलागलसाला ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    अलसाला । असि । पूर्वा । सिलाञ्जाला । असि । उत्तरा । नीलागलसाला ॥१६.४॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 6; सूक्त » 16; मन्त्र » 4
    Acknowledgment

    पदार्थ -
    [हे परमेश्वर !] तू (अलसाला) आलसियों को रोकनेवाली (पूर्वा) प्रधान शक्ति (असि) है, और तू (सिलाञ्जाला) कण-कण को प्रकट करनेवाली और (नीलागलसाला) सब लोकों के घर [ब्रह्माण्ड में] व्यापक (उत्तरा) अति उत्तम शक्ति (असि) है ॥४॥

    भावार्थ - सर्वशक्तिमान् सर्वव्यापी परमेश्वर की महिमा को विचारते हुए मनुष्य सदा पुरुषार्थी होवें ॥४॥


    Bhashya Acknowledgment

    Meaning -
    You are Alasala, energiser of the weak, first and foremost. Later you are Silanjala, best in the home, and Nilagalasala, reaching unto every cell.


    Bhashya Acknowledgment
    Top