अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 23 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 23/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - शन्ताति देवता - आपः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - अपांभैषज्य सूक्त
    पदार्थ -

    (वरेण्यक्रतुः) उत्तम कर्म वा बुद्धिवाला (अहम्) मैं (अपसः) व्यापक (तत्=तस्य) विस्तृत ब्रह्म की (दिवा) दिन (च) और (नक्तम्) राति (सस्रुषीः सस्रुषीः) अत्यन्त उद्योगशील, (देवीः) प्रकाशमय (अपः) व्यापक शक्तियों को (उप) आदर से (ह्वये) बुलाता हूँ ॥१॥

    भावार्थ -

    मनुष्य परमेश्वर की शक्तियों का विचार करते हुए सदा पुरुषार्थ करें ॥१॥

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