अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 24 के मन्त्र

मन्त्र चुनें

  • अथर्ववेद का मुख्य पृष्ठ
  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 24/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - शन्ताति देवता - आपः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - अपांभैषज्य सूक्त
    पदार्थ -

    (आपः) व्यापक शक्तियाँ [वा जलधारायें] (हिमवतः) वृद्धिशील वा गतिशील परमेश्वर से [वा हिमवाले पहाड़ से] (प्रस्रवन्ति) बहती रहती हैं, और (समह) हे महिमा के साथ वर्तमान पुरुष ! (सिन्धौ) बहनेवाले संसार [वा समुद्र] में (सङ्गमः) उनका सङ्गम है। (देवीः) वे दिव्य गुणवाली शक्तियाँ [वा जलधारायें] (ह) निश्चय करके (मह्यम्) मेरे लिये (तत्) वह (हृद्द्योतभेषजम्) हृदय की चमक का भय जीतनेवाला औषध (ददन्) देवें ॥१॥

    भावार्थ -

    मनुष्य सर्वशक्तिमान् परमेश्वर की उपकार शक्तियों को विचार कर अपने दोष मिटावें, अथवा जल द्वारा रोगनाश करें ॥१॥

    कृपया कम से कम 20 शब्द लिखें!
    Top