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अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 24 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 24/ मन्त्र 3
    ऋषि: - शन्ताति देवता - आपः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - अपांभैषज्य सूक्त
    29

    सि॑न्धुपत्नीः॒ सिन्धु॑राज्ञीः॒ सर्वा॒ या न॒द्य स्थन॑। द॒त्त न॒स्तस्य॑ भेष॒जं तेना॑ वो भुनजामहै ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    सिन्धु॑ऽपत्नी: । सिन्धु॑ऽराज्ञी: । सर्वा॑: । या: । न॒द्य᳡: । स्थन॑ । द॒त्त । न॒: । तस्य॑ । भे॒ष॒जम् । तेन॑ । व॒: । भु॒न॒जा॒म॒है॒ ॥२४.३॥


    स्वर रहित मन्त्र

    सिन्धुपत्नीः सिन्धुराज्ञीः सर्वा या नद्य स्थन। दत्त नस्तस्य भेषजं तेना वो भुनजामहै ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    सिन्धुऽपत्नी: । सिन्धुऽराज्ञी: । सर्वा: । या: । नद्य: । स्थन । दत्त । न: । तस्य । भेषजम् । तेन । व: । भुनजामहै ॥२४.३॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 6; सूक्त » 24; मन्त्र » 3
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    पदार्थ -
    (सिन्धुपत्नीः) बहनेवाले संसार [वा समुद्र] की पालनेवाली, (सिन्धुराज्ञीः) बहनेवाले जगत् की शासन करनेवाली, [वा समुद्र की शोभा बढ़ानेवाली] (याः) जो तुम (सर्वाः) सब शक्तियाँ (नद्यः) [परमेश्वर की] स्तुति करनेवाली [वा नदियाँ] (स्थन) हो। वे तुम (नः) हमें (तस्य) हिंसक रोग की (भेषजम्) ओषधि (दत्त) दो, (तेन) उससे (वः) तुम्हारे [गुणों को] (भुनजामहै) हम भोगें ॥३॥

    भावार्थ - जिस परमेश्वर ने मनुष्य के सुख के लिये अनन्त रचनायें की हैं, उसकी उपासना करके मनुष्य सदा शान्ति पावें और जल द्वारा रोगनिवृत्ति करें ॥३॥


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    Meaning -
    O streams of Apah, water and karma, that flow in the flux of existence, that sustain us by the glory of the cosmic ocean and shine and rule by the splendour of the infinite sea, pray give us that sanative peace of good health against that pain of agitation by which we may enjoy the beauty and pleasure of the flow without pain and suffering.


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