ऋग्वेद मण्डल - 9 के सूक्त 2 के मन्त्र
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10

मन्त्र चुनें

  • ऋग्वेद का मुख्य पृष्ठ
  • ऋग्वेद - मण्डल 9/ सूक्त 2/ मन्त्र 1
    ऋषि: - मेधातिथिः देवता - पवमानः सोमः छन्दः - निचृद्गायत्री स्वरः - षड्जः
    पदार्थ -

    (सोम) हे सौम्यस्वभाव ! और  (देववीः) दिव्य गुणयुक्त परमात्मन् ! आप  (पवस्व) हमें पवित्र करें और  (इन्दो) हे ऐश्वर्य्ययुक्त ! आप  (रंह्या) शीघ्र ही  (विश) हमारे हृदय में प्रवेश करें और  (पवित्रं) पवित्र तथा  (अति) अवश्य रक्षा करें ॥१॥

    भावार्थ -

    परमात्मा की कृपा से ही पवित्रता प्राप्त होती है और परमात्मा की कृपा से ही पुरुष सब प्रकार के ऐश्वर्य्य से सम्पन होता है। जिस पुरुष के मन में परमात्मदेव का आविर्भाव होता है, वह सौम्य स्वभावयुक्त होकर कल्याण को प्राप्त होता है ॥१॥

    पदार्थ -

    (सोम) हे सौम्यस्वभावयुक्त ! (देववीः) दिव्यगुणयुक्त परमात्मन् ! त्वम् (पवस्व) अस्मान् पवित्रान् कुरु किञ्च (इन्दो) हे ऐश्वर्य्ययुक्त परमात्मन् ! भवान् (इन्द्रम्) ऐश्वर्य्यं प्रापयतु तथा (वृषा) हे आनन्दवर्षुक ! त्वम् (रंह्या) वेगेन (विश) अस्मद्धृदयं विश (पवित्रम्) पवित्रान् कुरु तथा (अति) अवश्यं रक्ष ॥१॥

    कृपया कम से कम 20 शब्द लिखें!
    Top