अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 129/ मन्त्र 19
श्येनी॒पती॒ सा ॥
स्वर सहित पद पाठश्येनी॒पती॑ । सा॥१२९.१९॥
स्वर रहित मन्त्र
श्येनीपती सा ॥
स्वर रहित पद पाठश्येनीपती । सा॥१२९.१९॥
भाष्य भाग
हिन्दी (4)
विषय
मनुष्य के लिये प्रयत्न का उपदेश।
पदार्थ
(सा) वह [सेवा करनेवाली बुद्धि-म० १७] (श्येनीपती) शीघ्र गतिवाली प्रजाओं की स्वामिनी होकर ॥१९॥
भावार्थ
उत्तम बुद्धिवाला मनुष्य शीघ्र काम करनेवाला, स्वस्थ और उपकारी वचन बोलनेवाला होता है ॥१९, २०॥
टिप्पणी
१९−(श्येनीपती) अ० ३।३।३। श्यैङ् गतौ-इनच्, ङीप्+पति-ङीप्। श्येनीनां शीघ्रगामिनीनां प्रजानां स्वामिनी (सा) केविका बुद्धिः-म० १७ ॥
विषय
सेवक के चार लक्षण
पदार्थ
१. गतमन्त्र में वर्णित (सा) = वह सेवावृत्ति (श्येनीपती) = [श्यैङ्गती, पा रक्षणे] खूब क्रिया शीलतावाली है तथा सदा रक्षणात्मक कार्यों में प्रवृत्त रहती है। २. यह सेवावृत्ति (अनामया) = रोगों से शुन्य है। सेवावृत्तिवाला व्यक्ति रोगी नहीं होता। भोगवृत्ति से ऊपर उठने का यह परिणाम स्वाभाविक ही है। ३. यह सेवावृत्ति (उपजिह्विका) = गौण जिहावाली है। सेवावृत्तिवाला व्यक्ति न खाने के चस्केवाला होता है, न बहुत बोलने की वृत्तिवाला। यह कम खाता है और कम बोलता है। इसी से यह सदा स्वस्थ रहता है।
भावार्थ
सेवा की वृत्ति में चार बातें होती हैं [क] क्रियाशीलता [ख] रक्षणात्मक कर्मों में प्रवृत्ति [ग] नीरोगता [४] कम खाना, कम बोलना।
भाषार्थ
हे जीवात्मन् (सा) वह प्रकृति तो (श्येनीपती=श्येनीपतिः) नानाविधरूप-रंगोंवाली वेश्या समान है, जो तुझे विमोहित कर रही है।
विषय
वीर सेना और गृहस्थ में स्त्री का वर्णन।
भावार्थ
(श्येनपर्णी) श्येन के समान शत्रु पर वेग से आक्रमण करने वाले पुरुष के पालन सामर्थ्य से युक्त, अथवा श्येनाकार व्यूह के पक्षों को धारण करने वाली (सा) वह सेना है। अथवा—स्त्री श्येन के समान वीर एवं ज्ञानवान् पुरुष को पालक पति रूप से स्वीकार करने वाली है।
टिप्पणी
‘श्येनीपती सा’ इति शं० पा०।
ऋषि | देवता | छन्द | स्वर
अथ ऐतशप्रलापः॥ ऐतश ऋषिः। अग्नेरायुर्निरूपणम्॥ अग्नेरायुर्यज्ञस्यायात यामं वा षट्सप्ततिसंख्याकपदात्मकं सूक्तम्॥
इंग्लिश (4)
Subject
Prajapati
Meaning
Nature as reason and intelligence, in Satvika form, is a saving power too.
Translation
That wisdom is protector of subjects.
Translation
That wisdom is protector of subjects.
Translation
who enjoys the juices of the Prakriti, deep-red, white and black? (i.e., rajas, satva, and tama Gunas).
संस्कृत (1)
सूचना
कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।
टिप्पणीः
१९−(श्येनीपती) अ० ३।३।३। श्यैङ् गतौ-इनच्, ङीप्+पति-ङीप्। श्येनीनां शीघ्रगामिनीनां प्रजानां स्वामिनी (सा) केविका बुद्धिः-म० १७ ॥
बंगाली (2)
मन्त्र विषय
মনুষ্যপ্রয়ত্নোপদেশঃ
भाषार्थ
(সা) এই [সেবিকা বুদ্ধি-ম০ ১৭] (শ্যেনীপতী) শীঘ্র গতিশীল প্রজাদের স্বামিনী হয়ে ॥১৯॥
भावार्थ
উত্তম বুদ্ধিসম্পন্ন ব্যক্তি দ্রুত কাজ করে, সুস্থ থাকে এবং কল্যাণকর কথা বলে ॥১৯, ২০॥
भाषार्थ
হে জীবাত্মন্ (সা) সেই প্রকৃতি তো (শ্যেনীপতী=শ্যেনীপতিঃ) নানাবিধরূপ-রঙবিশিষ্ট বেশ্যা সমান, যে তোমাকে বিমোহিত করছে।
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